विडिओ – मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगो की मदद करने की एक पहल!

दीपिका पादुकोण द्वारा चलाये जा रहे, 'लिव लाफ लव फाउंडेशन' ने 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर एक विडिओ जारी किया है। यह विडिओ मानसिक रोग से जूझ रहे उन लोगो की परेशानियों को उजागर करता है, जो आपको अपने आसपास हँसते खेलते, मुस्कुराते या बाते करते हुए बिलकुल आम लोगो की तरह दिखाई देंगे।

भारत ने विकसित किया कुष्ठ रोग से बचाने वाला दुनियां का पहला टीका!

कुष्ठ रोग के खिलाफ भारत ने बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। भारत ने कुष्ठ रोग से छुटकारा पाने के लिए दुनिया का पहला टीका विकसित कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से भारत कुष्ठ रोग से लड़ाई में मजबूत होगा।

नवजात शिशुओ को अब सिर्फ एक छोटा सा ब्रेसलेट पहना कर बचाया जा सकता हैं!

भारत में हर साल हाइपोथरमिया से कई बच्चों की मौत होती है। यह ब्रेसलेट रेगुलर टेम्परेचर मॉनिटरिंग सिस्टम से बच्चों के शरीर के तापमान पर नजर रखेगा। इससे समय रहते बच्चों को हाइपोथरमिया से बचाया जा सकेगा।

महाराष्ट्र के सबसे पिछड़े हुए गाँव को अपना जीवन समर्पित कर विकसित किया इस डॉक्टर दम्पति ने !

डॉ. रविन्द्र कोल्हे और डॉ. स्मिता कोल्हे ने मेलघाट के वासियों की ज़िन्दगी बदल दी है। उन्होंने उस इलाके की स्वास्थ्य सुविधाओं को एक नया आयाम दिया है और लोगों को बिजली, सड़क और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराये हैं। आईये जाने उनके इस अद्भुत सफ़र की कहानी।

राईड ऑफ होप – कैंसर के मरीजों को जीने की कला सीखाता 26 साल का युवक !

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का अगर किसी को पता चल जाये, तो आदमी जीने की उम्मीद छोड़ देता है़ उसके मन में सिर्फ यही आता है कि अब जिंदगी समाप्त हो गयी है़। लेकिन हौसला हो तो कैंसर को भी मात दिया जा सकता है़।

कैंसर के कारण अपनी बेटी को खो देने वाली माँ बनी सैकड़ों कैंसर पीड़ितों का सहारा!

शीबा अमीर ने अपनी बेटी को कैंसर के आगे अपनी ज़िन्दगी को हारते देखा है। अपने दुःख को भुला कर अब वो कैंसर पीड़ितों की मदद अपनी संस्था “सोलेस” के द्वारा कर रही है।

रांची के डॉ मुखर्जी जो पांच रुपये में करते हैं मरीजों का ईलाज !

महंगे ईलाज के इस युग में कुछ फरिश्ते अभी भी है, जो भगवान बनकर गरीबों के ईलाज के लिए तत्पर है। इनके लिए डॉक्टर की उपाधि भगवान का दिया एक तोहफा है जो जरूरतमंदों की भलाई करने के लिए है, ना कि सिर्फ और सिर्फ कमाई करने के लिए। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही चिकित्सकों में से एक है जिन्होनें अपने पेशे के साथ- साथ सामाजिक कर्तव्य को आज भी जिंदा रखा है।

एक डॉक्टर जिसने कैंसर से लड़ाई में दान कर दी जिंदगी भर की कमाई!

यूं तो आपने बहुत सारे चिकित्सको के बारे में पढ़ा और सुना होगा लेकिन समाज के हित के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई एक अस्पताल के निर्माण के लिए दान कर दें, ऐसे चिकित्सक देश और दुनिया में विरले ही है।

सिस्टम से लड़कर गरीब कैंसर पीड़ितो का इलाज कर रहे है महाराष्ट्र के डॉक्टर स्वप्निल माने!!

" माँ, मैं बड़ा होकर डॉक्टर बनूँगा और मुफ्त में इलाज करके गरीबो की सेवा करूँगा” -अपने एक पडोसी को कैंसर से मरते हुये देखकर ८ साल के स्वप्निल माने ने अपने माँ से वादा किया। बीस साल बाद स्वप्निल ने अपने पत्नी के साथ मिलकर महाराष्ट्र के ५२ गाँवो में जाकर हजारो कैंसर ग्रस्त लोगो की मदत की है और आज तक ५५० मरीजो का मुफ्त में इलाज किया है।

डॉक्टरो का कहना था कि वह सिर्फ सौ घंटे जी सकेगी! आज 16 साल की मुस्कान सबके लिए एक मिसाल है!

डॉक्टरो का कहना था कि मुस्कान सौ घंटे से ज़्यादा नहीं जी पायेगी। पर आज मुस्कान 16 साल की है और हज़ारो लोगो के जीने की प्रेरणा है। मुस्कान ने दो किताबे लिखी है, एक प्रेरक प्रवक्ता (मोटिवेशनल स्पीकर) है, रेडियो पर एक शो करती है और इससे भी कई ज़्यादा और भी बहुत कुछ कर रही है।

‘हेल्पिंग हैंड’ के ज़रिये ज़रूरतमंदों को मिल रहे है व्हीलचेयर जैसे कई उपकरण सिर्फ १ रूपये में !

विकलांगो की मदत के लिए साधन ज़्यादातर बहुत महंगे होते है। एक व्हीलचेयर की कीमत हज़ारो में होती है, वही बैसाखियाँ खरीदने के लिए भी कुछ सौ रूपये आपको खर्च करने ही पड़ते है। कई बार तो इस्तेमाल करने वाले को बहोत कम समय के लिए इनकी ज़रूरत होती है। वड़ोदरा की फाल्गुनी दोषी ने इन साधनो को कम दाम में ज़रूरतमंदों तक पहुचाने का बीड़ा उठाया।

डॉक्टर की सूझ-बूझ से बची हवाई जहाज में, दो साल के बच्चे की जान!

जब डॉ गुरु ने सुना कि उन्ही की फ्लाइट में किसी बच्चे को अस्थमा का अटैक आया है, तो उन्होंने जल्दी से एक प्लास्टिक की बोतल का इनहेलर बनाया। इस उपकरण से उस बच्चे को समय पर काफी आराम पहुचा।

सब्जियां बेचने से लेकर मशहूर डॉक्टर बनने का सफ़र – डॉ. विजयलक्ष्मी देशमाने के संघर्ष की कहानी !

ये कहानी एक ऐसी महिला की है जिसने अपनी ज़िन्दगी में कई उतार चढ़ाव देखे है। एक झोपड़पट्टी में रहकर सब्जी बेचने से लेकर एक कैंसर विशेषज्ञ बनने तक की उनकी कहानी बिलकुल अनोखी है।

कैंसर की दवाइयां अब होंगी सस्ती !!!

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जल्द ही एक ऐसा कदम उठाया जा रहा है जो कैंसर पीड़ितों के लिए एक बड़ी राहत सिद्ध होगा। सरकार कैंसर की दवाओं तथा उस से जुड़े उपकरणों का मूल्य निर्धारित करने पर विचार कर रही है।

80 साल के मेडिसिन बाबा है गरीबो के मसीहा!

80 साल की उम्र में ये शख्स रोज़ 5 से 7 किलोमीटर चलकर घर घर जाकर दवाइयाँ इकटठा करते है। आईये मिलते है मेडिसिन बाबा से जिनका सपना है की वे उन लोगो के लिए मेडिसिन बैंक खोले जिनके पास दवाईयां खरीदने के पैसे नहीं होते।