बिना मिट्टी के खेती की इस अनोखी तकनीक से संकट से उबर सकते है किसान!

कनिका ने क्लेवर बड की स्थापना की है, जो खेती करने के ऐसे तरीके पर काम करती है, जिससे न सिर्फ फसलों की गुणवत्ता अच्छी होती है, बल्कि फसलें कहीं भी कभी भी आसानी से उगाई जा सकती हैं और वो भी बिना कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग के। इतना ही नहीं फसलें बिना मिट्टी के भी उगाई जा सकती हैं।

कौन बनेगा करोड़पति के एक एपिसोड को देख कर मिली प्रेरणा; अब कर रहे है हज़ारो किसानों की मदद!

कौन बनेगा करोड़पति शो में आयी एक प्रतिभागी की संघर्ष की कहानी सुनी तो अभिजीत फाल्के ने विदर्भ के किसानो की मदद करने की ठानी। उन्हे कार्यशालाओं के माध्यम से न सिर्फ जैविक खेती के आधुनिक तरीके सिखाये, साथ ही बिचौलियों को समाप्त कर उन्हे सीधा ग्राहकों से जोड़ा, उनका खोया आत्मविश्वास लौटाया और आज ये किसान विदेशों में भी अपना उत्पाद बेच रहे हैं।

एक ऐसा बाज़ार जहाँ अब आप आधार कार्ड दिखाकर सब्जियां खरीद और बेच सकते है!

500 और 1000 के नोट बंद होने के दस दिनों बाद भी लोगो की परेशानी दूर होती नज़र नहीं आ रही है। लोगों को रोज़मर्रा के ज़रूरत का सामान खरीदने में भी दिक्कत हो रही है। पर वहीँ हैदराबाद के कूकटपल्ली रायतू बाजार में माहौल कुछ और ही है। यहाँ ग्राहकों ने करीब 15000 की सब्जियां खरीदी है।पर इस बाज़ार में खरीदारी के लिए लोगों को न पुराने नोट बदलने की चिंता करनी पड़ी और न ही नए नोट न होने की वजह से परेशान होना पडा क्यूंकि यहाँ सब्जियां नोटों से नहीं आधार कार्ड से खरीदी गयी।

एक डॉक्टर, जिन्होंने अपने गाँव में 11 डैम बनवाकर किया सूखे का इलाज!

डॉ अनिल जोशी ने अपने मरीजों की मदद करने का बीड़ा उठाया और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से जल सरंक्षणवादी बन गए।

मुंबई आकर भीख मांगने और गजरे बेचने को मजबूर किसानो के बच्चो को देश का पहला सिग्नल स्कूल दिखा रहा है जीने की नई राह !

मोहन उन हज़ारो किसानो के बच्चो में से एक है जो अपना गाँव, अपना खेत और अपना घर छोड़कर रोज़गार की तलाश में मुंबई आते है। पर यहाँ भी गरीबी और भुखमरी उनका साथ नहीं छोडती। ऐसे में शिक्षा के बारे में सोचना तक उन्हें दूर की बात लगती है। पर अब देश के पहले सिग्नल स्कूल के खुल जाने से मोहन जैसे कई बच्चो को अपने भविष्य को सुधारने का मौका मिल रहा है।