पियूष पाण्डेय : चाय चखने से लेकर विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह बनने तक का सफ़र!

पियूष पाण्डेय का नाम भारतीय विज्ञापन जगत में मशहूर है और इनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता असीमित होती है। अपने अलग तरह के विज्ञापनों के कारण, पियूष ने अनगिनत पुरस्कार जीते हैं और असीमित प्रशंसा बटोरी है।

कनाडा की बर्फ में भंगड़ा करके पूरी दुनिया में अपना रंग जमा रहे है ये भारतीय युवक!

कुछ पंजाबी युवाओं का ग्रुप है मैरीटाइम भंगड़ा ग्रुप, जो कनाडा में रहने वाले पंजाबी युवाओं ने मिलकर बनाया है। इस ग्रुप के भंगडे को देखकर पूरी दुनिया झूम रही है।

मिलिए माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए प्रख्यात कुमारटूली की पहली महिला मूर्तिकार से !

चायना 17 साल की उम्र से इस कला से जुड़ी हुई है। इस कला पर पुरुषो की अधिक सत्ता होने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में अपना एक अलग मकाम बनाया है।

इस राखी में लगे बीज को बोयियें और जुड़े रहिये इन्हें बनाने वाले किसानो और बुनकरों से !

ग्राम आर्ट प्रोजेक्ट ने खास राखियाँ तैयार की हैं जो उन्हें बनाने वाले कामगरों की कहानी कहती हैं। पहली बार ग्राहक उन किसानो से जुड़ेंगे जिन्होंने इस राखी के लिए कपास उगाया है और उन बुनकरों को जानेगे जिन्होंने इसके धागे बुने है।

१२ अद्भुत तस्वीरे जिन्हें देखकर आप पुष्कर की अदम्य सुन्दरता और धार्मिक प्रशांत में खो जाएँगे।

पुष्कर, जो राजस्थान का एक प्राचीन शहर है संसार के गिने चुने ब्रह्म मंदिरों का केंद्र है। अजमेर जिले में स्थित इस शहर को “तीर्थ राज” अर्थात् तीर्थ स्थलों का राजा कहा जाता है।

क्यूँ उगा रहे है किसान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चेहरा अपने खेत में?

किसान - इस शब्द से जो सबसे पहला ख्याल हमारे मन में आता है वो है गरीबी, भुखमरी और ...आत्महत्या ! हम सब इस तस्वीर को बदलना चाहते है लेकिन उसके लिए हमे उनकी समस्या के जड़ तक पहुंचना होगा। इसी काम को करने के लिए कलाकारों का एक दल पिछले छह महीनो से मध्य प्रदेश के पारडसिंगा नामक गाँव में युवा किसानो के साथ मिलके खेती कर रहा है। पर ये खेती दाल, चावल या सब्जियों की नहीं है बल्कि एक सन्देश की है। एक सन्देश देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नाम।

जानिये क्यूँ ये कलाकार अपनी तस्वीरों में औरतों की जगह गहनों, जमीन और पैसो से बदल रही है !

कनेडियन –भारतीय कलाकार बलजीत सिंह अपनी चित्र श्रंखला ‘पराया धन’ से दहेज़ प्रथा के खिलाफ आवाज़ उठा रही है।

दिल्ली के इस उपेक्षित रेलवे स्टेशन को कैनवास की तरह सजा रहे है ये कलाकार !

उत्तर रेलवे ने स्टेशन को स्वच्छ एवं सुसज्जित करने के अपने प्रयास को और मज़बूत करते हुए, दिल्ली स्ट्रीट आर्ट ग्रुप के कलाकारों से संपर्क कर नरेला स्टेशन को एक नया रूप दिया। दिल्ली स्ट्रीट आर्ट, फोटोग्राफर योगेश सैनी द्वारा आरम्भ की गयी, एक ऐसी संस्था है जो देश में कला को बढ़ावा दे रही है। अलग अलग जगह के कलाकारों की मदद से इसे आगे बढाया जा रहा है।

भारत और जापान के कलाकार मिल कर सजा रहे है बिहार के इस गाँव के स्कूल की दीवारों को !

बिहार राज्य में स्थित सुजाता गाँव में हर साल निरंजना पब्लिक वेलफेयर स्कूल ‘वाल आर्ट फेस्टिवल’ का आयोजन करते है। भारत और जापान दोनों देशो के असंख्य कलाकार इस उत्सव में शामिल होने के लिये ३ हफ्ते इसी गाँव में आकर रहते है।