गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय – कबीर दास !

आप भले ही हिंदी साहित्य या हिंदी के लेखको और कवियों से परिचित हो न हो पर संत कबीर का लिखा, 'गुरु' को समर्पित एक दोहा आप सभी ने ज़रूर पढ़ा या सूना होगा। प्रस्तुत है गुरु के लिए लिखे संत कबीर के दोहे और उनकी व्याख्या।