भुला दिये गए नायक : सरस्वती राजामणि, भारत की स्वतंत्रता के लिए किशोरावस्था में बनी ब्रिटिश खेमे में जासूस।

एक महिला जिनका जीवन हमेशा खतरों व साजिशों से भरा रहा पर उन्होंने अपने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह महिला थी भारत की सबसे कम उम्र की जासूस, 16 साल की सरस्वती राजामणि, जिन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के खुफिया विभाग के लिए सूचनाएँ जुटाने का कार्य किया।

[विडिओ] : भारत का ख़त आया है…क्या आप पढेंगे?

भारत... हमारा प्यारा देश! सोचिये यदि हमारा देश एक व्यक्ति के रूप में बदलकर हमसे कुछ कहना चाहता तो क्या कहता? या फिर जिस देश में हम ख़ुशी से रहते है, यहाँ के वासी होने पर गर्व महसूस करते है, कभी इसका गुनगान करते है और कभी कोंसते है, वो देश, हमारा भारत हमारे बारे में क्या सोचता होगा? अगर भारत को मौका मिले तो वो हमे कैसा ख़त भेजेगा? आईये जानते है आगाज़ क्रिएशन द्वारा निर्मित इस शोर्ट फिल्म में कि भारत ने ख़त में आपको क्या लिखा है!

भगत सिंह – मौत ही जिनकी माशुका थी !

आज़ादी के दीवाने और भारत माँ के सपूत क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 में लायलपुर ज़िले के बंगा में (अब पाकिस्तान में) सरदार किशन सिंह के यहाँ हुआ।

भुला दिए गए नायक, जिन्होंने विभाजन के दौरान बचाई कई ज़िंदगियाँ!

आजादी दिलाने वाले नेताओं के नाम सबकी जुबां पर अमर हो गए। लेकिन इस बँटवारे में अपनी जान की बाजी लगाकर ज़िंदगियाँ बचाने वालों को भुला दिया गया। आज हम लेकर आए हैं ऐसी ही कहानियां जिन्हें आप आमतौर पर नहीं सुनते, न इनकी गाथाएं आजादी के इतिहास से जुडी हैं और न ही इनकी बरसी मनाकर याद किया जाता है।

जानकीदेवी बजाज -आजादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली त्याग की प्रतिमूर्ति !

जानकी देवी बजाज संस्था (फाउंडेशन ) IMC की महिला विंग - जानकीदेवी बजाज पुरस्कार उन सभी महिला उद्यमियों द्वारा किये गए कामों को प्रोत्साहित और सम्मानित करता है जो उनके द्वारा ग्रामीण भारत में किये जा रहे हैं।

‘आजादी’ के असल मायने साकार करती झारखंड की ग्रामीण महिलाएं!

गांव की इन महिलाओं ने आजादी को अपना ब्रांड बनाया है। आईए हम और आप इन महिलाओं से जुड़कर इनके गरीबी मुक्त झारखण्ड के सपने को धरातल पर उतारने में मदद करें और इस स्वतंत्रता दिवस par इनके ब्रांड - 'आजादी' को प्रोत्साहित करें।

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – राम प्रसाद बिस्मिल !

बिस्मिल की यह गज़ल सभी क्रान्तिकारी जेल से पुलिस की गाडी में अदालत जाते हुए, अदालत में मजिस्ट्रेट को चिढ़ाते हुए और अदालत से लौटकर वापस जेल आते हुए एक साथ गाया करते थे। बिस्मिल की शहादत के बाद उनका ये गीत क्रान्तिकारियों के लिए मन्त्र बन गयी थी। न जाने कितने क्रांतिकारी इसे गाते हुए हँसते हँसते फांसी पर चढ़ गए थे।