‘मुझे सामान की तरह उठाया गया’- एक दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता की आपबीती से उठी सुविधाजनक रेलवे की मांग!

विराली दिव्यांग अधिकारों की सशक्त कार्यकर्ता हैं। वे लेखिका और अभिनेत्री होने के साथ साथ 2014 की मिस व्हीलचेयर रनर-अप भी रही हैं। उन्हें भारतीय रेलवे के साथ कई बार संघर्ष करना पड़ा, जहां उन्हें दिव्यांग होने की वजह से मजबूरी में पुरुषों द्वारा उठाया गया। विराली अपने साथ घटी इन घटनाओं को बन्द करवाना चाहती हैं।

परिस्थिति के आगे घुटने न टेक, संपन्न और शिक्षित उर्वशी ने खोला छोले कुलचे का ठेला!

उर्वशी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक फेसबुक पोस्ट उनके जीवन को बदल देगा| इनकी कहानी फेसबुक पर छा गयी और जल्दी ही इनके ठेले पर पूरे गुडगाँव से लोग आने लगे|

[विडियो]: कैसे होते हैं हिन्दुस्तानी मुस्लमान? आईये जानते है!

अक्सर ये सवाल उठता है कि एक हिन्दुस्तानी मुसलमान कितना हिन्दुस्तानी है? क्या वो पहले मुसलमान है या पहले हिन्दुस्तानी? इसी सवाल का जवाब कोम्युन के मंच पर हुसैन हैदरी ने दिया है।

बेटी को खोने के बाद भी, पकिस्तान से इस पिता ने भेजा था भारत को प्यार भरा ख़त!

पकिस्तान से भारत अपना इलाज कराने आई 13 साल की अबीहा ने 7 मई 2015 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में दम तोड़ दिया। पर जाने से पहले वो भारत से सिर्फ प्यार और अपनापन लेकर गयी और यही प्यार उसने भारत को भी दिया। पकिस्तान लौटकर अबीहा के पिता, इमरान ने भारत के नाम एक धन्यवाद पत्र लिखा।

इस कैब ड्राईवर के जवाब ने साबित कर दिया कि हिन्दुस्तानी हर मुश्किल में साथ है!

जहाँ पुरे देश ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री की इस कड़ी पहल का स्वागत किया वहीँ कई ऐसे लोग भी थे जिन्हें इस फैसले की वजह से कई मुसीबतों का सामना करना पडा। ऑटो चालक, पेट्रोल पंप तथा छोटी दुकानों पर जहाँ दुकानदारों के 500 और 1000 के नोट लेने से मना कर देने से लोग मुश्किल में पद गए वही सोशल मीडिया पर एक ओला कैब ड्राईवर की दरियादिली की कहानी खासी चर्चित रही।

भारत-पकिस्तान सीमा पर बसे तीन बच्चो की दोस्ती की कहानी!

कहते है बच्चे भगवान् का रूप होते है। और भगवान् की कभी किसीसे कोई दुश्मनी नहीं होती; उनके लिए सब एक जैसे होते है। भारत- पकिस्तान की दुश्मनी की खबरों के बीच ऐसे ही कुछ बच्चो की कही कुछ बाते हर किसी के दिलों को छु रही है।

हाँ, मुझे सेरिब्रल पाल्सी है पर मैं आप सभी से अलग नहीं हूँ !

बचपन से ही सेरिब्रल पाल्सी से गेअस्त राजवी ने कभी अपनी शारीरिक कमी को अपनी इच्छाशक्ति के आड़े नहीं आने दिया। जीवन के कई उतार चढ़ाव और संघर्षो से जूझने के बाद आज राजवी स्वयं अपने पैरो पर कड़ी है और लाखो लोगो के लिए एक मिसाल है !

अनुभव – मुझे अपने बच्चो को पालने के अलावा और कुछ नहीं आता था और मैंने यही किया !

जब मेरे पति का देहांत हो गया तो मैं सोचती थी कि अब मैं कैसे जिउंगी.... मैंने अपनी सारी ज़िन्दगी बस घर ही संभाला था ...मुझे बस अपने बच्चो को पालना आता था और कुछ नहीं।

‘वो चार बिस्कुट’ जिनसे मुझे अनजान, बुजुर्ग अम्मा को इन्साफ दिलाने की प्रेरणा मिली !

डॉ. विभु शर्मा ने जब बुज़ुर्ग और अकेली कैलाशो अम्मा के डिब्बे में सिर्फ चार बिस्कुट देखे तो उन्होंने उनकी मदद करने की ठान ली। लाख मुश्किलें आई पर डॉ. शर्मा ने कड़े संघर्ष और सोशल मीडिया की मदद से आखिर अम्मा को उनका हक़ दिला ही दिया। आईये जानते है अम्मा को हक दिलाने की, डॉ. विभु शर्मा के संघर्ष की कहानी।

दान का सही अर्थ तो तब है जब देने के लिए आपको खुद कुछ खोना पड़े !

समाज सेवा और दान धर्म की कई कहानियाँ आपने पढ़ी होंगी, आप कई ऐसे लोगो को भी जानते होंगे जो गरीब दुखियो की मदद के लिए तथा उन्हें दान देने के लिए हमेशा तत्पर रहते है। पर आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहे है जिसे सुनकर आपको दान का सही अर्थ समझ में आएगा! ये कहानी मूलतः दिलीप मेनेज़ेस के अनुभव पर आधारित है!

दो विदेशी.. एक जज़्बा… और… एक ‘पिंक ब्रेसलेट’ !

दूर से ली गयी एक धुंधली फोटो, १.२५ अरब की आबादी में एक बच्ची को ढूंढने का संकल्प और मन में उठते कई सवालो के साथ दो विदेशी भारत आये। क्या वह बच्ची उन्हें मिली? उस बच्ची को ढूँढने के पीछे मकसद क्या था? क्या ये मकसद कामयाब हुआ? आईये जानते हैं इनके सफ़र की कहानी और खोजते हैं इन सवालों के जवाब इस लेख में –

2015 में हुए दस ऐसे उदाहरण जो आपको यकीन दिलाएंगे कि भारत अब भी है ‘सारे जहाँ से अच्छा’ !

भारत वो नहीं जो हमें दिखाया जा रहा है, भारत वो है, जो हम अपने आस पास रोज़ देखते है। ऐसे ही जब हमने अपनी आँखे खोलकर देखने की कोशिश की तो हमें ऐसे उदाहरण दिखाई दिए जो इस बात का सबूत थे कि हमारा देश अब भी ‘सारे जहाँ से अच्छा’ है! आईये आप भी देखे २०१५ में हुए ऐसे १० उदाहरण जो आपको भी इस बात का यकीन दिलाएंगे।

‘अनुभव’ – चेन्नई की बाढ़ में मैंने बहुत कुछ खो दिया पर ये अनुभव मुझे बहुत कुछ सिखा भी गया !

चेन्नई में आई बाढ़ में हमारा घर तबाह हो गया। हम दो दिन तक मदद की उम्मीद में बैठे रहे। बरसो की जमाई पूंजी ख़त्म हो गयी पर फिर भी इस बाढ़ ने हमें इंसानियत और नेकदिली पर भरोसा करना सिखाया !

महाराष्ट्र के एक किसान की विधवा बनी हिम्मत की मिसाल !

खराब फसल तथा क़र्ज़ की मार की वजह से, पिछले छे महीने में सिर्फ महाराष्ट्र में ही करीब १३००० किसानो ने अपनी जान ले ली। जब इनके रहते इनके परिवार की इतनी बुरी दशा थी, तो ज़रा सोचिये कि इनके जाने के बाद इनके परिवारवालों पे क्या बीत रही होगी। ऐसे ही एक किसान की विधवा है किरण! पर किरण की कहानी हार की नहीं, जीत की कहानी है, हिम्मत की कहानी है!

सिर्फ ६० रूपये में करिये हवाई जहाज की सैर !!

क्या आप कभी हवाई जहाज पर नही बैठे? आइये हम आपको बताते हैं कि महज ६० रूपये में आप कैसे जहाज पर बैठ सकते हैं। अगर आपके पास ६० रूपये भी नहीं हैं तो कोई बात नही,आप इसमें मुफ़्त में भी बैठ सकते हैं। रिटायर्ड वायुयान इंजिनियर बहादुर चंद गुप्ता आपको ख़ुशी ख़ुशी ये जहाज दिखाएंगे।