4 सर्जरी और 500 स्टिचस के बाद भी, ये प्रेरक नेवी ऑफिसर हैं वापसी को तैयार।

मौत का सामना करा देने वाली दुर्घटनाओं से गुजरना हमेशा ही एक बुरे सपने की तरह होता है। बिनय कुमार, एक पूर्व नेवी ऑफिसर ने भी ऐसी ही एक दुर्घटना का सामना किया लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने इसी शानदार जज्बे के चलते अब वो वापसी को तैयार है।

मुंबई के 300 छात्रों ने 2 साल तक हर रविवार साथ मिलकर काम किया और इस गाँव में बना दिये 107 शौचालय।

मुंबई के किशिनचंद चेलारम महाविद्यालय के छात्रो ने सभी को प्रभावित करते हुये पलघर जिले के कारवाले गाँव में 107 शौचालय निर्मित किए हैं जिसमें गाँव में रह रहे हर परिवार के लिए एक शौचालय है।

देशप्रेम के चलते आँगनबाड़ी में काम करने वाली माँ के इस लाल ने छोड़ी TCS कि मोटी तनख्वाह वाली नौकरी, सेना में हुआ भर्ती।

बढ़िया वेतन और सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जी रहे भारत दरबार सिंह जाधव टीसीएस में सिस्टम इंजीनियर के रूप मे कार्यरत थे। पर महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के एक छोटे से गाँव में आंगनबाड़ी सहायिका के इस बेटे के भीतर कुछ और हासिल करने का जज़्बा पनप रहा था, उनका मुक़ाम था सेना मे शामिल होकर अपने देश कि सेवा करना।

जानिये कैसे आईआईटी के प्रोफ़ेसरो की मदद से 5 मिनट से भी कम समय में बन रहा है रेल्वे का टाइमटेबल!

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी, मुंबई (IIT-B) के प्रोफ़ेसर की टीम ने सेंट्रल रेल्वे के साथ मिलकर ऐसी ऐल्गोरिदम तैयार की है, जिससे यह टाइम टेबल तैयार करने में लगने वाला 14 सप्ताह का समय घटकर 5 मिनट हो गया है।

एक अनजाने फोन को सुनकर ये युवा पहुंचे 2 महीने से भूखी वृद्धा के पास; आज वह पूर्णरूप से स्वस्थ है।

चरन जिन्हें उनकी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल ‘हेल्पिंग फोर्स फ़ाउंडेशन’ के अध्यक्ष और स्थापक के रूप में वर्णित करती है, जो आंध्र के विजियांगरम में जरूरतमंदों की मदद करता है, ने एक अनजान कॉल पर कार्यवाही करते हुये तुरन्त स्थल पर पहुँच कर उन महिला को कुपोषण स्थिति में पाया।

डम्पिंग यार्ड से एक हरे-भरे पार्क के रूप में, माहिम नेचर पार्क का शानदार रूपान्तरण!

धारावी बस डीपो के पास स्थित माहिम नेचर पार्क कभी एक डम्पिंग यार्ड हुआ करता था, जहां पूरे मुंबई शहर से ला कर रोज़ सैकड़ो टन कचरा डाला जाता था। 1977 में प्रशासन द्वारा इसका उपयोग बंद कर दिये जाने पर तीन लोगों ने इसके स्वरूप को बदलने की ठानी और आज यह मुंबई शहर में प्रकृति प्रेमियो का पसंदीदा स्थान बन गया है।

पेशे से सीए रह चुकी देविका, पशुओं के संरक्षण के लिए बना रही है चमड़ा-मुक्त जूते!

पशुओं के प्रति प्रेमभाव रखने वाली देविका ने जब भारत में चमड़े और कैनवस जूतो के बीच की खाई को देखा तो उन्होने अपना पेशा छोड़ हमे चमड़े की जगह एक बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराने की ठानी और अपना खुद का एक  ब्रांड स्थापित किया।

नकली नोटों के झांसे से बचे; ऐसे पहचाने नए 2000 व 500 के असली नोटों को!

हम आपके लिए लाए हैं कुछ ऐसी जानकारी जिससे आप पता लगा सकते हैं कि आपके हाथ में जो नोट हैं वह असली है या नकली।

कौन बनेगा करोड़पति के एक एपिसोड को देख कर मिली प्रेरणा; अब कर रहे है हज़ारो किसानों की मदद!

कौन बनेगा करोड़पति शो में आयी एक प्रतिभागी की संघर्ष की कहानी सुनी तो अभिजीत फाल्के ने विदर्भ के किसानो की मदद करने की ठानी। उन्हे कार्यशालाओं के माध्यम से न सिर्फ जैविक खेती के आधुनिक तरीके सिखाये, साथ ही बिचौलियों को समाप्त कर उन्हे सीधा ग्राहकों से जोड़ा, उनका खोया आत्मविश्वास लौटाया और आज ये किसान विदेशों में भी अपना उत्पाद बेच रहे हैं।

सतत विकास की और बढ़ते कदम: 15 ऐसे गाँव जिन्हें देखकर आपका मन करेगा अपना शहर छोड़ यहाँ बस जाने को!

कुछ गाँव ऐसे है जो सुविधाओं में किसी शहर से कम नहीं है पर उनके मूल में वही भारतीय ग्रामीण संस्कृति बसती है। यह कुछ ऐसे गाँव है जो ना सिर्फ अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में पूरी तरह से आत्मनिर्भर है, साथ ही मानव जाति व प्रकृति के बीच किस तरह अद्भुत सामंजस्य बनाया जा सकता है, इसकी मिसाल पेश करते हैं।

भुला दिये गए नायक : सरस्वती राजामणि, भारत की स्वतंत्रता के लिए किशोरावस्था में बनी ब्रिटिश खेमे में जासूस।

एक महिला जिनका जीवन हमेशा खतरों व साजिशों से भरा रहा पर उन्होंने अपने देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह महिला थी भारत की सबसे कम उम्र की जासूस, 16 साल की सरस्वती राजामणि, जिन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के खुफिया विभाग के लिए सूचनाएँ जुटाने का कार्य किया।

मिलिये इस किसान से जिसने चावल की 850 से भी ज्यादा किस्मों को सहेज कर म्यूज़ियम बना डाला।

मांड्या जिले के छोटे से गाँव में रहने वाले सैयद गनी खान एक संग्रहालय (म्यूज़ियम) में संरक्षक है। उन्होंने एक अनूठी पहल की और एक ऐसा म्यूज़ियम तैयार कर दिया जहां आज चावल की 850 व 115 के आसपास आम की विभिन्न किस्मों को ना सिर्फ संरक्षित किया गया है, बल्कि उनकी खेती भी की जाती है।

पुरे गाँव की मदद से एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे ने आइआइटी में पढाई की और आज है गूगल में इंजिनियर!

जब एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे को भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश का अवसर मिला तो कैसे पूरे कस्बे ने आगे आकार उनकी मदद की; और आज वह गूगल के सिएटल  स्थित कार्यालय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।