१२ अद्भुत तस्वीरे जिन्हें देखकर आप पुष्कर की अदम्य सुन्दरता और धार्मिक प्रशांत में खो जाएँगे।

पुष्कर, जो राजस्थान का एक प्राचीन शहर है संसार के गिने चुने ब्रह्म मंदिरों का केंद्र है। अजमेर जिले में स्थित इस शहर को “तीर्थ राज” अर्थात् तीर्थ स्थलों का राजा कहा जाता है।

जानिये कैसे आम सेवा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस की क्रांति ला रहे हैं !

समूचे देश में ऐसे ग्रामीणों की संख्या बढती जा रही है जो आम सेवा केन्द्रों पर जाकर सरकारी दफ्तरों की लम्बी लाइन से बच रहे हैं। ये आम सेवा केंद्र ई-गवर्नेंस के केन्द्रों की तरह काम करते हैं।

#IamBrandBihar – बिहार और बिहारियों के बारे में हमारी सोच को बदलने की एक मुहिम !

फिल्म “ उड़ता पंजाब” में बिहार की जो छवि दिखाई गयी है, वो छवि पुरे बिहार का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है। भारत के हर हिस्से में विविधता है और आप किसी एक व्यक्ति को उस हिस्से की छवि नहीं मान सकते। इसी बात को कहने के लिए और बिहार की छवि को एक नयी परिभाषा देने के लिए बंगलुरु के रहने वाले २५ वर्षीय छात्र, बशर हबीबुल्लाह ने एक ऑनलाइन मुहिम छेडी है।

महाराष्ट्र के सबसे पिछड़े हुए गाँव को अपना जीवन समर्पित कर विकसित किया इस डॉक्टर दम्पति ने !

डॉ. रविन्द्र कोल्हे और डॉ. स्मिता कोल्हे ने मेलघाट के वासियों की ज़िन्दगी बदल दी है। उन्होंने उस इलाके की स्वास्थ्य सुविधाओं को एक नया आयाम दिया है और लोगों को बिजली, सड़क और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराये हैं। आईये जाने उनके इस अद्भुत सफ़र की कहानी।

इस गाँव के बच्चे स्कूल नहीं जाते थे, फिर एक दिन इन तीन लड़कियों ने सबकुछ बदल दिया!

ये कहानी उन तीन लड़कियों और उनके कभी न थकने वाले हौसले की हैं जिसने एक गाँव की शिक्षा व्यवस्था की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी। ये गाँव उत्तर प्रदेश में वाराणसी के नजदीक है। इन लड़कियों ने ताने भी सुने और अपमान भी सहा पर अपनी लड़ाई जारी रखी। उनकी कोशिशों का ही नतीजा है कि आज इस गाँव के ९०% बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाते हैं।

जानिये क्यूँ ये कलाकार अपनी तस्वीरों में औरतों की जगह गहनों, जमीन और पैसो से बदल रही है !

कनेडियन –भारतीय कलाकार बलजीत सिंह अपनी चित्र श्रंखला ‘पराया धन’ से दहेज़ प्रथा के खिलाफ आवाज़ उठा रही है।

हाँ, मुझे सेरिब्रल पाल्सी है पर मैं आप सभी से अलग नहीं हूँ !

बचपन से ही सेरिब्रल पाल्सी से गेअस्त राजवी ने कभी अपनी शारीरिक कमी को अपनी इच्छाशक्ति के आड़े नहीं आने दिया। जीवन के कई उतार चढ़ाव और संघर्षो से जूझने के बाद आज राजवी स्वयं अपने पैरो पर कड़ी है और लाखो लोगो के लिए एक मिसाल है !

आई आई टी खडगपुर के छात्रों ने बनायी, विकलांगो की सहूलियत के लिए बिना ड्राईवर की बाइक!

जो लोग विकलांग होने के कारण स्टीयरिंग या पेडल नहीं चला सकते, उनके लिए साइकिल स्टेशन बनाने के लिए और वातावरण के मसलों को सुलझाने के लिए आई आई टी खड़गपुर के छात्रों ने बिना ड्राईवर की बाइक बनाई है। आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

एक इंजिनियर जिसने टैक्सी ड्राईवर बनकर लोगो को जीवन दान दिया !

पेशे से मैकेनिकल इंजिनियर, विजय ठाकुर ने अपना पहला बच्चा महज इसलिए खो दिया क्यूंकि रात के समय कोई टैक्सी वाला उन्हें अस्पताल तक ले जाने के लिए तैयार नहीं था। वे चाहते थे कि जो हादसा उनके साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो और इसलिए वे अपनी नौकरी छोड़कर टैक्सी ड्राईवर बन गए।

जब एक डिज़ाइनर ने घरेलु काम करनेवाली एक महिला को अपनी मॉडल के तौर पर चुना तो जादू ही हो गया।

मंदीप नेगी एक फैशन डिज़ाइनर हैं। वो शेड्स ऑफ़ इंडिया की डायरेक्टर हैं, जो भारत में एक जाना माना ब्रांड है। कमला जहाँ काम करती थी, मंदीप उसके ठीक बगल वाले घर में रहती हैं। वो अपने नए कलेक्शन के लिए एक चेहरे की तलाश में थी और तभी उन्होंने कमला को देखा और उन्हें लगा कि उनकी तलाश अब पूरी हो गयी।

कविता लेखन को करियर के तौर पर उभारने के लिए इस युवक ने छोड़ा अपना सुनहरा करियर !

देश के बड़े शहरो में परफॉरमेंस पोएट्री लोकप्रिय होता जा रहा है, और इसका पूरा श्रेय जाता है राघवेन्द्र मधु को जिन्होंने २१०४ में पोएट्री कोउचर की शुरुआत की ।

कैंसर के कारण अपनी बेटी को खो देने वाली माँ बनी सैकड़ों कैंसर पीड़ितों का सहारा!

शीबा अमीर ने अपनी बेटी को कैंसर के आगे अपनी ज़िन्दगी को हारते देखा है। अपने दुःख को भुला कर अब वो कैंसर पीड़ितों की मदद अपनी संस्था “सोलेस” के द्वारा कर रही है।

एक ऑस्ट्रेलियन, जिसने शौचालय को भारत की बच्चियों की शिक्षा के आड़े नहीं आने दिया !

एक ऑस्ट्रेलियाई मार्क बल्ला २०१३ से भारत के स्कूलों में शौचालय बनवाने के लिए पैसे इकठठे कर रहे हैं । धारावी के एक स्कूल को देखने के बाद उन्होंने एक संस्था बनाई जिसका उद्देश्य स्कूलों में २०,००० शौचालय बनाना है ताकि लड़कियों को अपनी पढाई बीच में ही न छोडनी पड़े।

शिक्षा को १७००० फुट की ऊँचाई तक पहुंचा रही है एक अकेली महिला !

लद्दाख के सुदूर गाँव के उन १०० उत्साही बच्चों के लिए वो तोहफा लेकर आई थी -१५०० किलो स्कूल का सामान जिसे माइनस २० डिग्री के तापमान पर और ३ माउंटेन पास (पहाड़ी में से निकलते रस्ते) को पार कर, २५ घोडो पर लाद कर लाया गया था। मिलिए, सुजाता साहू से जो शिक्षा को दिल्ली से लेह तक लेकर आई है।