इस क्रिकेट खिलाड़ी ने 3 बच्चो की जान बचाते हुए दे दी अपनी जान !

उन्होंने देखा कि एक 12 साल की बच्ची ढहती हुयी इमारत के निचे खड़ी थी। तभी बबलू ने तुरंत दौड़कर बच्ची को बचा लिया। बबलू ने और एक बच्चे को भी बचा लिया और तीसरे बच्चे को बचाने के लिये कूद पड़े। दुर्भाग्यवश तिसरे बच्चे को बचाते हुए बबलू को खुद की जान जोखिम में डालनी पड़ी।

भारत की पहली महिला नाई, शांताबाई की अद्भुत कहानी!

अपने स्वर्गीय पति का व्यवसाय आगे चलाकर शांताबाई ने अपने परिवार को सहारा दिया।पुरुष-प्रधान समाज में सिर्फ पुरुषो द्वारा ही चलाये जानेवाले व्यवसाय को अपनाकर, वो भारत की पहली महिला नाई बनी।

समाज को बेहतर बनाने के लिए ‘उद्देश सोशल फाउंडेशन’ के युवा करा रहे हैं लोगों से लोगों की मदद!

उमरखेड गाँव के युवकों ने उद्देश सोशल फाउंडेशन की स्थापना करके समाज का कल्याण और गरीबो की मदद करने का जिताजागता उदाहरण दिया है। आईये जानते है इस संस्था और आयोजित विभिन्न कार्यक्रम के बारे में।

छुट्टे पैसे के बदले टॉफी नहीं; ग्रामीण छात्राओं की मदद करने का मौका देगा ये एप!

क्या आप दुकानदार से छुट्टे पैसो की बजाय चोकलेट दिये जाने से परेशान है? अब कुछ ही दिनों में आप छुट्टे पैसे ग्रामीण इलाके में पढने वाली लडकियों के शिक्षा के लिये दे सकते है। इस तरह का मोबाइल एप स्कूल में पढने वाली विद्यार्थीयो ने विकसित किया है।

भारतीय इतिहास के 14 हैरतंगेज़ और रोमांचित रहस्य !

अगर आप कठिन से कठिन पहेलियाँ बुझाने में माहिर है और ऐतिहासिक किस्सों में दिलचस्पी रखते है तो भारतीय इतिहास के इन अनसुलझे रहस्यों को जानकर आश्चर्यचकित हो जायेंगे।

‘काऊइस्म’ – स्वदेशी गाय हो सकती है किसानो की हर समस्या का हल !

काऊइसम (Cowism), कंप्यूटर इंजिनियर, चेतन राउत द्वारा शुरू किया गया एक स्टार्ट अप है। चेतन का मानना है कि खेती के साथ साथ स्वदेशी गाय पालन ही किसानो की आत्महत्या रोकने का एकमात्र उपाय है।

ईमानदारी का दूसरा नाम है मुंबई के टैक्सी ड्राईवर, गदाधर मंडल !

५३ वर्षीय गदाधर मंडल मुंबई में टैक्सी चलाते है और अपनी ईमानदारी की वजह से जाने जाते है। मोबाइल फ़ोन टैक्सी में भूलने वाले ग्राहकों को गदाधर ढूंडकर फ़ोन वापस करते है इसलिये उनकी एक अलग पहचान बन चुकी है। सन २००४ से लेकर २०१४ तक उन्होंने तक़रीबन १४ मोबाइल ग्राहकों को लौटाये है।

अगर आप पुरानी बॉलीवुड फिल्मो के दीवाने है तो ये विंटेज पोस्टर्स आपको खुश कर देंगे !

डिजिटल दुनिया की क्रांति से पहले शहरों और छोटे गावों में रंगीन, भड़कीले और हाथ से पेंट किये गये बॉलीवुड सिनेमा के पोस्टर्स हर जगह दिखाई देते थे। उस ज़माने में पोस्टर्स ही किफायती और कुशल विज्ञापन थे जिसे देखकर दर्शक सिनेमाघरों में खिचे चले आते थे।

जानिये भारत की पहली महिला जासूस, रजनी पंडित के दिलचस्प किस्से !

भारत की पहली महिला जासूस के हिसाब से ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां महिलाये काम करे और सफल ना हो पांए। आइये जानते है एक महिला जासूस की दिलचस्प कहानियाँ और काम के दौरान उनके द्वारा निभाये गये विभिन्न भूमिकांओ के किस्से।

दिल्ली के मंगोलपूरी इलाके में सेफ हाउस की मदद से अब महिलायें है बिलकुल सुरक्षित !

अगर आप दिल्ली के मंगोलपूरी इलाके से गुजरेंगे तो आपका ध्यान इस बात पर ज़रूर जायेगा कि यहाँ की महिलाएं किस तरह बेखौफ घर से बाहर निकलती है। उन्हें किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या परेशानी का डर नहीं सताता। पूरा इलाका सेफ-हाउस मैकेनिज्म (सुरक्षित-घर युक्ति) से वाकिफ है जिससे महिलाएं उत्पीड़न से सुरक्षित रहती है।

भारत और जापान के कलाकार मिल कर सजा रहे है बिहार के इस गाँव के स्कूल की दीवारों को !

बिहार राज्य में स्थित सुजाता गाँव में हर साल निरंजना पब्लिक वेलफेयर स्कूल ‘वाल आर्ट फेस्टिवल’ का आयोजन करते है। भारत और जापान दोनों देशो के असंख्य कलाकार इस उत्सव में शामिल होने के लिये ३ हफ्ते इसी गाँव में आकर रहते है।

इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट वापस ला रहा है भारत से चुराई गयी भारत की धरोहर !

मंदिर, चर्च और अन्य स्मारको में रखी हुयी किमती कलाकृतिया जैसे मूर्ति और शिल्प हमेशा से चुराये जाते आये है और उन्हें तस्करी करके देश के बाहर भेजा जाता है। पर कुछ लोग है जो चुरायी गयी इन सभी चिज़ो को वापस लाकर अपने सही जगह पहुचाने का काम निस्वार्थ भाव से कर रहे है।

साउथ कोरिया के लोग हर साल अयोध्या आकर करते है अपने पूर्वजो को याद!

उत्तर प्रदेश के अयोध्या शहर में हर साल साउथ कोरिया देश के लोग अपने देश की महाराणी हुर ह्वांग-ओके को याद करने के लिये आते है।

अपंगत्व को मात देकर अभिषेक ठावरे बन गया है भारत का पहला तिरंदाज जो दातों से कमान खीचता है!!!

नसीब ने उसका दायिना हाथ और पैर छिनकर उसे हरा दिया था पर अभिषेक ठावरे नसीब को मात देकर भारत का दातों से कमान खिचनेवाला पहला तीरंदाज (टीथ आर्चर) बन गया।

सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बनाया शिक्षा का अनोखा मॉडल!!!

जिला परिषद् के एक सामान्य स्कूल को एक नौजवान शिक्षक ने अपनी मेहनत से डिजिटल स्कूल में परिवर्तित किया है। इस स्कूल से प्रेरित होकर महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के ५०० स्कूलो को डिजिटल बनाने का फैसला किया है।