शिमला का यह सुन्दर कैफ़े उम्रकैद की सज़ा काट रहे कैदियों द्वारा चलाया जाता है

इस कैफ़े को राज्य पर्यटन विभाग द्वारा चलाया जा रहा है और इसके पीछे की मंशा इन कैदियों का पुनर्वास और समाज से जोड़ना है।

झारखण्ड की नयी भोजन वितरण योजना पहुंचाएगी करीब 70000 कमज़ोर आदिवासी परिवारों तक भोजन

पिछले दिनों राज्य सरकार द्वारा झारखण्ड के आदिवासी गाँवों तक हांथो हाथ खाना पहुंचाने की एक योजना लायी गयी। इसका मकसद करीब 70,000 अत्यधिक गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाना है।

बाहुबली का महिष्मति साम्राज्य, भारत के इस प्राचीन शहर के नाम पर आधारित है!

ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, महिष्मति एक मध्यवर्ती भारत में स्थित एक शहर था , जो अब मध्य प्रदेश नामक राज्य बन गया है। कई अभिलेखों और साथ ही कहानियों में भी इस शहर का उल्लेख मिलता है, जो यह बताते हैं कि यह एक शहर और एक एक समय में सामाजिक-राजनीतिक केंद्र था।

इस व्यक्ति की मदद से बिना बिजली बिल भरे आप वातानुकूलित घर में रह सकते हैं!

दिनेश के इस नए घर ने शुन्य से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया है और इसके लिए इन्हें एक बार भी अस्थायी बेस्कॉम कनेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

पौधों को भी गर्मी लगती है! आईये जानें इस गर्मी में कैसे रखें अपने बगीचे को हरा-भरा

गर्मियां आते ही मन में आइसक्रीम और आमों का ख्याल मन में आने लगता है इसके साथ ही हम ऐ.सी. की ठंडी हवा के लिए बेताब हो जाते हैं । इस समय जब हम गर्मियों में ठंडक देने वाले खानों और खुद को ठण्ड पहुंचाने वाली चीजों से जुड़ने लगते हैं, हमारे बगीचे सूरज के तपती किरणों को झेल कर सूखते चले जाते हैं । आइये हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे सरल उपायों के बारे में जिससे कडाके की धुप में भी हमारे पौधे सुरक्षित रहे ।

पियूष पाण्डेय : चाय चखने से लेकर विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह बनने तक का सफ़र!

पियूष पाण्डेय का नाम भारतीय विज्ञापन जगत में मशहूर है और इनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता असीमित होती है। अपने अलग तरह के विज्ञापनों के कारण, पियूष ने अनगिनत पुरस्कार जीते हैं और असीमित प्रशंसा बटोरी है।

मिलिए झारखंड के एक ऐसे व्यक्ति से जिसने जुहू तट पर अब तक 50 जानें बचाई है!

बंटी राव, जुहू तट पर तैनात एक स्वयंसेवक लाइफ गार्ड है जो किसी भी आपात की स्थिति में आपकी मदद को तैयार रहता है ।

रसगुल्ला : मिठास, विवाद, इतिहास और कुछ रोचक बातें!

कोलकाता की गलियाँ हो, या पूरी का मंदिर या फिर राष्ट्रपति भवन के गलियारे, रसगुल्ला भारत के सबसे अधिक लोकप्रिय मिष्ठानो में से एक रहा है। एक ओर जहाँ बंगाली इसे अपनी धरोहर मानते हैं, वहीँ दूसरी ओर उड़िया इसे अपना आविष्कार! रोसोगोल्ला बोलें, या रोशोगोल्ला या फिर रसबरी, अन्य देशो में भी इस मिठाई ने अपने झंडे गाड़े हैं।

परिस्थिति के आगे घुटने न टेक, संपन्न और शिक्षित उर्वशी ने खोला छोले कुलचे का ठेला!

उर्वशी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक फेसबुक पोस्ट उनके जीवन को बदल देगा| इनकी कहानी फेसबुक पर छा गयी और जल्दी ही इनके ठेले पर पूरे गुडगाँव से लोग आने लगे|

हिन्दी दिवस पर जानिये इस दिन से जुड़े कुछ तथ्य, तत्व और मुख्य आयोजन!

हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर 1949 को स्वीकार किया गया। इसकी स्मृति को ताजा रखने के लिये 14 सितम्बर का दिन प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

आपको सुकून की चाय और मूक बधिरों को रोज़गार देता रायपुर का ‘नुक्कड़ चाय कैफ़े’!

रायपुर के नुक्कड़ चाय कैफ़े में आपका स्वागत है । यहाँ समय बिताने का मतलब सिर्फ चाय का लुत्फ़ उठाना ही नहीं है बल्कि उस से भी कुछ ज्यादा है । यहाँ पर गुजरने वाला समय आपको सांकेतिक भाषा सिखाएगा, किताबो के पन्नो में ख़ुद डूबाना सिखाएगा, कुछ कवितायें गुनगुनाना सिखाएगा, अपने जैसे दूसरे लोगों से आपको मिलवायेगा और नए लोगों के साथ दोस्ती करवाएगा !

गणपति की 5 ऐसी मूर्तियाँ, जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी!

गणेश चतुर्थी आने वाली है और लोग गणपति की मूर्तियों की खरीदारी में जुट चुके हैं। ये मूर्तियाँ प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की बनी हुई होती हैं जो स्वाभाविक तरीके से पानी में घुलती नहीं हैं और इन्हें पेंट करने वाले रंग भी पर्यावरण को दूषित करते हैं। इन नुकसानों को ध्यान में रखते हुए कई लोग और संगठन इसका विकल्प ढूंढने में लगे हैं और कुछ इसमें सफल भी हुए हैं।

सीसी टीवी के ज़माने में यहाँ चलती है ऐसी दुकाने जहाँ दुकानदार नहीं बैठते!

सी सी टीवी के युग में, मिजोरम में मिसाल पेश करती यह दुकानें खुद में एक प्रेरणा है। एक ऐसी प्रेरणा जो हमें सिखाती हैं कि विश्वास और इमानदारी एक दुसरे की पूरक है। एक के बिना दुसरे का होना असंभव है और जहाँ ये दोनों साथ है वहां एक बेहतर समाज की तरफ कदम बढ़ाना और भी आसान है।

निःशुल्क टिफ़िन सेवा के बदले बुजुर्गों की दुआएं बटोर रहे है मुंबई के मार्क !

आई सी कॉलोनी, बोरीवली, मुंबई में रहने वाले, ४० वर्षीय मार्क डी’सूजा ने अपनी ख़ुशी उन वृद्धो की मुस्कान में खोज ली है जिन्हें वे पिछले तीन सालों से मुफ्त टिफ़िन सेवा दे रहे हैं। आइये जानते हैं मार्क का ये सफ़र।

किसान : मैथिलीशरण गुप्त !

बाहर निकलना मौत है, आधी अँधेरी रात है, है शीत कैसा पड़ रहा, औ’ थरथराता गात है. तो भी कृषक ईंधन जलाकर, खेत पर हैं जागते, यह लाभ कैसा है, न जिसका मोह अब भी त्यागते