मुंबई के डब्बावाले अपने डिब्बे में खाने के साथ साथ पहुंचा रहे है अंगदान करने का सन्देश !

अपने सामाजिक सरोकारों के लिए अनूठी पहचान बना चुके मुंबई डब्बावालों की टीम अब आम लोगों को टिफिन के साथ-साथ अंग दान पर जागरुक भी कर रही है। अंग दान पर जागरुकता के अभाव में कई तरह के मिथक समाज में फैले है। इन मिथको को तोड़ने और आम आदमी को अंग दान से जोड़ने की श्रीमद राजचंद्रन अंगदान कार्यक्रम से जुड़कर मुंबई डब्बावाले समाज को आईना दिखाने का काम कर रहे है।

‘आजादी’ के असल मायने साकार करती झारखंड की ग्रामीण महिलाएं!

गांव की इन महिलाओं ने आजादी को अपना ब्रांड बनाया है। आईए हम और आप इन महिलाओं से जुड़कर इनके गरीबी मुक्त झारखण्ड के सपने को धरातल पर उतारने में मदद करें और इस स्वतंत्रता दिवस par इनके ब्रांड - 'आजादी' को प्रोत्साहित करें।

‘तितलियां’ – युवाओं की एक पहल जो झुग्गी के बच्चों की बेरंग ज़िन्दगी में रंग भर रही है!

बच्चे, बचपन और उनके चेहरे की मुस्कान को बचाने के लिए रांची में युवाओं की एक टोली आगे आई है। तितलियां नाम की संस्था रांची के युवा बिजनसमैन अतुल गेरा ने स्थापित की है। इस संस्था से रांची के कई युवा जुड़े है जो गरीब बच्चों की जिंदगी संवारने के लिए लगातार काम कर रहे है। मिलिए इन युवाओं की टोली से जो अपने जज्बे से रांची के झुग्गियों में रहने वाली बच्चियों की बेरंग जिंदगी में अपने जज्बे से रंग भर रहे है।

युवा प्रेरणा यात्रा: गांव, युवा और रोजगार को जोड़ने की एक अनोखी पहल!

युवा प्रेरणा यात्रा में हर साल करीब 100 युवाओं की टोली को असल जिंदगी के नायक चैंपियन्स से मिलाते है ताकि ये युवा भी दूसरों के लिए मिसाल बन सके।

34 साल की उम्र में माँ बनी दसवी में टॉपर, बेटे ने दुहराया इतिहास!

गरीबी के कारण आठवी कक्षा के बाद पढाई छोड़ चुकी ज्योती ने आखिर 34 साल की उम्र में , दो बच्चो की माँ बनने के बाद टॉपर बनकर दसवी पास की। पर उनके लिए असल गौरव का क्षण तब था जब उनके बेटे ने भी उसी स्कूल में इस साल दसवी में टॉप कर के उनका इतिहास दुहराया। आईये जाने इस टॉपर माँ- बेटे की कहानी।

राईड ऑफ होप – कैंसर के मरीजों को जीने की कला सीखाता 26 साल का युवक !

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का अगर किसी को पता चल जाये, तो आदमी जीने की उम्मीद छोड़ देता है़ उसके मन में सिर्फ यही आता है कि अब जिंदगी समाप्त हो गयी है़। लेकिन हौसला हो तो कैंसर को भी मात दिया जा सकता है़।

देश की पहली ट्रांसजेंडर सेल्स टैक्स ऑफिसर बनकर ऐश्वर्या ने बदली समाज की सोच !

ओडिशा की ऐश्वर्या रितुपर्णा प्रधान को हर तरह की चुनौतीयों को मात देते हुए अपने हौसले के बूते देश की पहली ट्रांसजेंडर सेल टैक्स ऑफिसर बनने का गौरव प्राप्त है।

साठ बर्षो से जल, जंगल और जमीन बचाने की मुहीम चला रहा है झारखंड का ये वाटरमैन !

बीते 60 वर्ष से सिमोन की जिंदगी में कुछ भी नहीं बदला लेकिन हजारों गांव वालों की जिंदगी में बदलाव लाने का श्रेय इस शख्स को जाता है। 84 साल की उम्र में भी सिमोन ऊरांव सुबह साढ़े चार बजे उठकर खेत और जंगल की ओर निकल पड़ते है, कई तरह की मुसीबतों का सामना कर सिमोन ने अपने गांव के पास सालों पहले पौधारोपण किया था , जो आज जंगल का रूप ले चुके है और रोजाना सुबह उठकर वो इन पेड़ों और पौधो की एक झलक लेने निकल जाते है।

शादी की सालगिरह मनाने का नायाब तरीका – ५० परिवारों को दिया अनोखा तोहफा !

रांची के अमित जालान और अनीता जालान ने अपनी शादी की पच्चीसवीं सालगिरह को कुछ इस अंदाज में मनाया कि वो करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए। रांची के मोरहाबादी स्थित वृन्दावन में आयोजित इस भव्य उत्सव की तस्वीरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सालगिरह का उत्सव कितना भव्य रहा होगा, लेकिन चौंकिएगा नहीं, ये भव्य आयोजन जालान दंपत्ति ने अपने लिए नहीं, झारखंड की २५ गरीब बेटियों की शादी के लिए किया था।

रांची के डॉ मुखर्जी जो पांच रुपये में करते हैं मरीजों का ईलाज !

महंगे ईलाज के इस युग में कुछ फरिश्ते अभी भी है, जो भगवान बनकर गरीबों के ईलाज के लिए तत्पर है। इनके लिए डॉक्टर की उपाधि भगवान का दिया एक तोहफा है जो जरूरतमंदों की भलाई करने के लिए है, ना कि सिर्फ और सिर्फ कमाई करने के लिए। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही चिकित्सकों में से एक है जिन्होनें अपने पेशे के साथ- साथ सामाजिक कर्तव्य को आज भी जिंदा रखा है।

[विडियो]- इस गणतंत्र दिवस पर देखे कैसे ला सकते है आप देश में बदलाव !

खुद में वह बदलाव लाएं , जो आप देखना चाहते है। महात्मा गांधी की कही ये पंक्तियां गणतंत्र के 67वें उत्सव पर भी बिल्कुल सटीक बैठती है। 26 जनवरी उत्सव है देश के गणतंत्र बनने का ...यह उत्सव है देश को संविधान मिलने का ...यह उत्सव है तिरंगे का ...यह उत्सव है राष्ट्रप्रेम का।

डिजिटल गांव के सपने को साकार करती, झारखंड की टैबलेट दीदी!

गोद में बच्चा और हाथो में टैबलेट ये नजारा झारखंड के गांवों में आम है, झारखंड के सुदूर गांवों की ये महिलाएं अपने घर- परिवार बच्चों का ध्यान रखने के साथ-साथ अपने घर को चलाने के लिए खूब मेहनत करती है। हाथ में टैबलेट लिये ये महिलाएं है झारखंड की 'टैबलेट दीदी'।

कभी नक्सली रह चुकी यह महिला, आज संवार रही है अपनी ज़िन्दगी !

जिस उम्र में बच्चे खेलते कूदते और पढ़ते है उस उम्र में शुगनी (बदला हुआ नाम) को नक्सली उसके घर से उठाकर ले गए। 9 साल की उम्र से करीब 7 साल तक शुगनी ने अपनी जिंदगी नक्सलियों के साथ काटी। लेकिन परिवारवालों की सहायता और अपनी हिम्मत के बलबूते पर आज शुगनी एक सामान्य जीवन जी रही है।

एक डॉक्टर जिसने कैंसर से लड़ाई में दान कर दी जिंदगी भर की कमाई!

यूं तो आपने बहुत सारे चिकित्सको के बारे में पढ़ा और सुना होगा लेकिन समाज के हित के लिए अपनी जिंदगी भर की कमाई एक अस्पताल के निर्माण के लिए दान कर दें, ऐसे चिकित्सक देश और दुनिया में विरले ही है।