सचिन तेंदुलकर के जीवन से जुड़ी कुछ अनकही कहानियाँ!

यहां सचिन तेंदुलकर के बारे में छह छोटी-छोटी कहानियां और उपाख्यानों की एक लिस्ट है, जो कि फिल्म में हो सकते हैं। इनमें से सचिन की किस कहानी को आप स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित होंगे?

देहरादून में एक स्कूल के माध्यम से 1500 खास बच्चों की जिंदगी संवार रही है ये दो सहेलियां!

देहरादून में खास जरूरत वाले बच्चों को जिंदगी जीने का तरीका सिखाते दो दोस्त - जो म्क्गोवान और मंजू की कहानी| 1996 में मंजू सिंघानिया और जो म्क्गोवान चोपड़ा ने एक ख़ास स्कूल की शुरुआत की थी जो ख़ास जरूरत वाले बच्चों के लिए था| अपनी इन कोशिशों से वो अब तक 1500 से भी ज्यादा बच्चों की जिंदगी को बेहतर बना चुके हैं| हालांकि, शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, पर अब जा कर उनकी मुहिम रंग लाई है| उनके इस संघर्ष और प्रयासों को जानने के लिए पढ़े उनकी ये बेहतरीन दास्तां|

भारत का जाबांज प्रहरी हवलदार अब्दुल हामिद जिसे मरणोपरांत मिला परम वीर चक्र!

पढ़िए हवलदार अब्दुल हामिद की कहानी जिनके अदम्य साहस और त्याग की वजह से भारतीय सेना 1965 की जंग में पकिस्तान की सेना पर हावी हो सकी।

2017 में पद्म पुरस्कार पाने वाले 16 ऐसे नायक जिनसे आप अब तक अनजान रहे!

पद्म पुरस्कार उन लोगों का उत्सव है जो असल जिंदगी में किसी अभिनेता से कम नहीं और जिन्होंने अपनी जिन्दगी भारत के नाम कर दी। पद्म पुरस्कार भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है जो की कला और सामाजिक क्षेत्र से लेकर विज्ञान के क्षेत्र तक अलग-अलग क्षेत्र के लोगों को सम्मानित किया जाता है। इस साल ये कुछ ऐसे लोगों को दिया गया है जिन्होंने भारत के लिए बिना थके लगातार कार्य किया है पर आज तक उन्हे कोई पहचान नही मिली थी। यह कुछ ऐसे ही हीरोस की बात की गई है जो इस देश इस विश्व को एक बेहतर जगह बनाते हैं।

इस दिवाली पर इस 13 साल की बच्ची की बनायीं कंदीले खरीदकर, बेसहारा लोगो के जीवन में लायें रौशनी!

बम्बई की एक 13 साल की क्षिर्जा राजे, अपने हस्तशिल्प व्यापार से कमायें सारे लाभ को ज़रूरतमंदों की सहायता में ख़र्च करती है। क्षिर्जा की कहानी हाल ही में “ ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे “ के फेसबुक पेज पर साझा की गयी थी।

आंध्र प्रदेश के इस छोटे से गाँव के हर घर में है एक सैनिक!

माधवरम की भव्य राइफलों और हेलमेट युद्ध स्मारक के पीछे एक बेहद दिलचस्प दास्ताँ है। अमरावती से 150 किलोमीटर दूर पश्चिमी आंध्र प्रदेश के गोदावरी ज़िले की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव है माधवरम। इस गाँव का अपने निवासियों को सैन्य सेवा में भेजने का एक अलग ही शानदार इतिहास है।

भगत सिंह – मौत ही जिनकी माशुका थी !

आज़ादी के दीवाने और भारत माँ के सपूत क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 में लायलपुर ज़िले के बंगा में (अब पाकिस्तान में) सरदार किशन सिंह के यहाँ हुआ।

अपनों की बेरुख़ी के शिकार बुजर्गों का सहारा बनी, 100 साल की अरुणा मुख़र्जी!

असम की 100 वर्षीय अरुणा मुख़र्जी ने गुवाहाटी नागरिक प्रशाशन से एक वृद्धाश्रम खोलने की अनुमति माँगी है। इस वृद्धाश्रम का संचालन वो खुद ही करेंगी।

शिक्षा से महरूम ज़िंदगियों में ज्ञान का दीप जलाते बंगलुरु के शेरवुड सोसाइटी के लोग!

बंगलुरु के टाटा शेरवुड रेज़िडेंशिअल सोसाइटी में घरेलू काम करने वालों के बच्चे हर रविवार दोपहर में ट्यूशन करने आते है, जो सोसाइटी में रहने वाले लोगों द्वारा संचालित की जाती है। इस सोसाइटी में रहने वाले लोग, एक स्वैछिक समूह 'SEE' के सदस्य हैं जो कि अपार्टमेंट में काम करने वाले कामगारों के बच्चों की स्कूल की सालाना फ़ीस के लिए चन्दा इक्कठा कर मदद करता है।

जानकीदेवी बजाज -आजादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली त्याग की प्रतिमूर्ति !

जानकी देवी बजाज संस्था (फाउंडेशन ) IMC की महिला विंग - जानकीदेवी बजाज पुरस्कार उन सभी महिला उद्यमियों द्वारा किये गए कामों को प्रोत्साहित और सम्मानित करता है जो उनके द्वारा ग्रामीण भारत में किये जा रहे हैं।

अपनी सूझ-बूझ से शिमला की एक गृहणी ने बचाई असम रायफल्स के एक घायल जवान की जान !

अपनी सूझबूझ और तत्परता से शिमला की एक महिला वीणा शर्मा ने असम रायफल्स के एक जवान को उस समय मौत के मुँह में जाने से बचाया जिस समय बाकी जवान एकदम असहाय महसूस कर रहे थे।

सौ साल की मन कौर ने वैनक्युवर सीनियर गेम्स प्रतियोगिता में भाग लेकर, बढ़ाया भारत का मान!

अग़र हौंसले बुलंद हों और इरादे चट्टान से, तो बढ़ती उम्र और लिंग जैसी बंदिशें अपने आप टूट कर बिखर जाती हैं। कुछ ऐसे ही मज़बूत इरादे और ज़ज्बा है 100 साल की मन कौर में। मन कौर वैनक्युवर सीनियर गेम्स प्रतियोगिता में सबसे उम्रदराज़ महिला प्रतिभागी बन गयीं हैं।

बेटी की शादी के लिए जोड़े हुए पैसो से उसके लिए 5 लाख की राइफल खरीद, मिसाल खड़ी की इस ऑटो-चालाक ने!

जिस दिन किसी घर के आँगन में कोई नन्ही सी कली खिलती है, उसी दिन से पिता उसकी शादी के लिए धन पाई-पाई जोड़ना शुरू कर देता है। पर अहमदाबाद में एक ऑटोरिक्शा ड्राईवर पिता ने इस सोच को बदल दिया है। उन्होंने बेटी की शादी से ज़्यादा उसके सपनों को सच करना ज़रूरी समझा।

इस छोटे से गाँव की 18 लड़कियों के हुनर को ओलिंपिक की राह दिखा रहे है आजमगढ़ के कोच अवधेश यादव !

आँखों में कुछ सपने , दिल में एक जूनून और हुनर हम सभी में होता है पर सही मार्गदर्शन के अभाव में हमारे ख्वाब अधूरे ही रह जाते हैं। पर उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव निबि में एक शख़्स ऐसा भी है जो अपने दिशानिर्देशन और लगन से कुछ ऐसे ही ख्वाबों को एक मुक़म्मल परवाज़ देने की कोशिश में जुटा हुआ है।

पिता ने ठुकरायी माँग, तो पंचायत ने तोहफे में बनवाया शौचालय!

जब एक सोलह साल की सुनीथा की, घर में शौचालय बनवाने की माँग को उसके शराबी पिता ने ठुकरा दिया, तब गांव की पंचायत ने इस बच्ची के लिए एक दिन में शौचालय बनवाकर उसे तोहफे में दे दिया।