जब १७ साल के इशान बलबले ने देखा कि साठे नगर झुग्गी के बच्चो को रोज़ डेढ़ किलोमीटर लम्बे एक गंदे, बदबूदार, कचरे से भरे नाले से गुज़रकर स्कूल जाना पड़ता है , तो उन्होंने इन बच्चो के लिए वहां एक पुल बनाने की ठानी। और ये करिश्मा उन्होंने महज़ आठ दिन में कर दिखाया।

मुंबई के एक झुग्गी, साठे नगर के बच्चों को हर दिन डेढ़ किलोमीटर पैदल चल कर स्कूल जाना पड़ता था। उनके स्कूल जाने का रास्ता केवल लम्बा ही नही, बल्कि गन्दा, बदबूदार था जिसमे एक १०० फ़ीट लम्बा खुला और गन्दा नाला भी था। बरसात के दिनों में जब नाला भर जाता था तब स्थिति और बदतर हो जाती थी और नाला पार करने वालों के लिए जानलेवा बन जाता था। साथ ही साथ वो नाला  मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों का भी स्रोत बन गया था।
फिर एक दिन एक १७  वर्षीय बारहवी के छात्र ने कुछ ऐसा किया जिससे साथे नगर के लोगों ने राहत की सांस ली।

मिलिये इशान बलबले से, जिसने बांस का पुल बना कर नाले के दोनों पार के हिस्सों को जोड़ दिया जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों का रास्ता साफ़ और सुरक्षित हो गया।

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जब इशान ने अगस्त में उस इलाके की दुर्दशा देखी तो उसने इस मामले को अपने हाथों में लेने का निश्चय किया। और इस तरह एक बरसों पुरानी समस्या का समाधान कुछ ही दिनों में हो गया। इशान जब वहां गए तो उन्होंने पाया कि वहां के लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजना नहीं चाहते थे, जिसका कारण वो नाला था जिसको पार करने में कुछ लोग अपनी जान से भी हाथ धो बैठे थे। नाले के अलावा लंबी दूरी और उचित सवारी का उपलब्ध न होना भी बच्चों के स्कूल न जाने का एक कारण था।
ये सब देखने के बाद इशान को जल्दी ही समझ आ गया कि यहाँ एक पुल बनाने की सख्त जरूरत है। लेकिन कंक्रीट का पुल बनाने के लिए म्युनिसिपेलिटी से इज़ाज़त लेना जरुरी था और उस में काफी समय लगता इसलिए इशान ने कुछ ऐसा बनाने का सोचा जो हल्का और मजबूत भी होगा और बच्चों के रोज़ आने जाने के लिए सुरक्षित भी होगा।

इस पुल को बनाने में ८ दिन लगे और यह ४ फुट चौड़ा और १०० फुट लम्बा है। इसपर एक बार में ५० लोग चढ़ सकते हैं। इसका उदघाट्न २९ अगस्त को किया गया। यह पुल साठे नगर को PGMP कॉलोनी से जोड़ता है।

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इशान इस पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी तब तक उठायेंगे जब तक सरकार इस समस्या का कोई उचित समाधान नहीं निकालती।

यह कोई पहली बार नहीं है जब इशान जरूरतमन्दों की मदद के लिए आगे आये है। दो महीने पहले ही ईशान ने एक स्वयंसेवी संस्था ‘ निर्भय युवा प्रतिष्ठान’ की स्थापना की थी, जो युवाओं को समाजसेवी कार्यों के लिए प्रेरित करती है।
इशान बच्चों का रास्ता आसान करने के बाद अब उस इलाके के शौचालय की  व्यवस्था को सुधारना चाहते हैं। जिसके लिए वे वार्ड ऑफिस से १० शौचालय बनाने की अनुमति ले रहे हैं|

इशान को ऐसे सराहनीय कार्यों के लिए प्रेरणा उनके माता पिता से मिलती है जिन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए एक स्कूल खोला है।
अपने इस कदम से यकीनन इशान ने कई दिल जीते हैं और हम आशा करते है कि उनसे प्रेरणा लेकर और भी युवक इस तरह के काम करने के लिए आगे आयेंगे।

All pics: Facebook

मूल लेख – श्रेया पारीक 

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