प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर 2016 को 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करवा कर सभी देशवासियों को अचम्भे में डाल दिया था। प्रधानमंत्री द्वारा काले धन के खिलाफ उठाये गए इस कठोर कदम का सुझाव दरअसल पुणे के अर्थक्रांती प्रतिष्ठान के सीए, अनिल बोकिल द्वारा दिया गया था।

अनिल बोकिल ने अब दावा किया है कि सरकार जल्द ही उनके दुसरे सुझाव को भी अपनाएगी और बाकी सभी करो को खारिज कर केवल बैंकिंग ट्रांजेक्षण टैक्स (बीटीटी) यानी की बैंक में किये आदान प्रदान पर कर जारी करेगी।

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इस कर की ख़ास बात ये होगी कि इसके अंतर्गत सभी कर पूरी तरह खारिज कर दिए जायेंगे, जिसमे की कस्टम ड्यूटी और आयकर (इनकम टैक्स) भी शामिल होंगे। इसके बदले सरकार बैंक में किये आदान प्रदान (ट्रांजेक्षण) के आधार पर कर लागू करेगी। इसमें क्रेडिट और डेबिट कार्ड से किये गए आदान प्रदान भी शामिल होंगे।

CNN IBN को दिए एक साक्षात्कार के दौरान बोकिल ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से मिली जीत के बाद सरकार अब इस ठोस कदम को उठाने के लिए बिलकुल तैयार है। बोकिल के मुताबिक़ बीटीटी लागू करने से कर व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता आयेगी।

बोकिल की टीम ने इस मॉडल का सुझाव सबसे पहले बीजेपी को 1999 में दिया था। इस मॉडल से जमा किये गए कर को सभी राज्य तथा केन्द्रीय सरकारों में बांटा जायेगा।

हालाँकि ये सब अभी भी सिर्फ एक आंकलन ही है, बोकिल मानते है कि ऐसा करने से काले धन पर निश्चित ही रोक लगाया जा सकेगा।

उम्मीद है कि सरकार हर कदम, देश के हित में ही उठाएगी!


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