गर आप मुंबई लोकल में सफर कर चुके हैं तो आपको वहाँ होने वाली भीड़ और एक के बाद एक आने वाली लोकल का पता होगा। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल रेलमार्ग देश के व्यस्ततम रेलमार्गों में से हैं। यहाँ हर रोज़ कई लोकल रेलगाड़ियां अपनी क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को अपनी मंज़िल तक लेकर जाती है, यात्री दबाव को देखते हुये रेल्वे के अधिकारियों के लिए सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है इन गाड़ियों का सही समय पर सही स्टेशन और सही प्लैटफ़ार्म पर होना।

क्या आपको पता है अधिकारियों को इन लोकल रेलगाड़ियों का टाइम टेबल तैयार करने में 2 सप्ताह से भी अधिक समय लगता है; पर अब नहीं!

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी, मुंबई (IIT-B) के प्रोफ़ेसर की टीम ने सेंट्रल रेल्वे के साथ मिलकर ऐसी ऐल्गोरिदम तैयार की है, जिससे यह टाइम टेबल तैयार करने में लगने वाला 14 सप्ताह का समय घटकर 5 मिनट हो गया है।  

Image for representation only. Source: By Shan.H.Fernandes, via Wikimedia Commons

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस टीम ने ऐसा सोफ्टवेयर तैयार किया है जिसके माध्यम से सब-अरबन रेल्वे की समय सारणी तैयार की जा सकती है। यह सोफ्टवेयर ऐसी कई प्रक्रियाओं को करने में सक्षम है, जिन्हें हाथ से करने में रेलवे के कई अधिकारियों को अपना समय देना पड़ता था। यह सोफ्टवेयर उन सभी गणनाओं को एक साथ कर कुछ ही मिनटों में रेलवे के लिए समय सारणी तैयार कर देता हैं।

रेल्वे की समय सारणी तैयार करने में लगने वाले समय को कम करने के अलावा यह सोफ्टवेयर अस्थिर रेक्स, विभिन्न टर्मिनल पर प्लैटफ़ार्म की उपलब्धता व अन्य कमियों व गड़बड़ियों का भी ध्यान रखता हैं।

यह सोफ्टवेयर जल्द ही शहर विशेष की आवश्यकता अनुरूप बदलावों के साथ पूरे देश के सब-अरबन रेलवे द्वारा अपनाए जाने की संभावनाएं है।

प्रोफ़ेसर नारायण रंगराज व मधु बेलुर, एम. टेक स्कॉलर सौम्या दत्ता व सेंट्रल रेलवे के डेप्युटी चीफ ऑपरेशन मैनेजर (गूड्स) के. एन. सिंह ने यह सोफ्टवेयर रेलवे के ऑपरेशन डिपार्टमेंट के सामने प्रस्तुत किया।

“यह सिर्फ आसानी और सरलता के साथ समय सारणी तैयार करने में ही हमारी मदद नहीं करेगा बल्कि यह हमारी आवश्यकताओं के अनुरूप समय सारणी बनाने व उनके हमारे अपनाने के उपलब्ध विकल्प भी हमें बताएगा,” सेंट्रल रेलवे के चीफ रिलेशन ऑफिसर नरेंद्र पाटिल ने बताया। रेल्वे इस टीम के साथ इसे उन्नत करने में 2 साल से कार्य कर रही है।

यह प्रोजेक्ट अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित होने वाला है क्योंकि इसके अंतर्राष्ट्रीय रेल्वे रिसर्च ऑपरेशन असोशिएशन(आईएओआरओआर) द्वारा अप्रैल में फ़्रांस में वैश्विक सेमिनार में प्रस्तुत किए जाने का विचार है।

मूल लेख: अदिति पटवर्धन


 

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