छ्त्तीसगढ़ के एक गांव में एक स्कूल बिना फीस के बच्चोंं को बेहतर शिक्षा दे रहा है, और बदले में फीस के तौर पर अभिभावकों को एक पेड़ लगाना होगा।

त्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले के बरगई गांव में ‘शिक्षा कुटीर’ आदिवासी बच्चों के लिए वरदान से कम नहीं है। ये जिले का पहला ऐसा इंग्लिश मीडियम स्कूल है जहां फ्री में पढ़ाई होती है और मुफ्त में ही बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म दिए जाते है और खास बात ये है कि फीस के एवज़ में अभिभावकों से स्कूल में ही एक पेड़ लगवाया जाता है जिसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी अभिभावको की ही होती है।

इस पहल के चलते इस गाँव में अब तक 700 पौधे लगाये जा चुके है।

हमारे देश में 22% लोग गरीबी रेशा के निचे जी रहे है। ऐसे में शिक्षा कुटीर जैसे स्कूल एक नयी उम्मीद लेकर आते है।

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 Photo source: facebook

अंबिकापुर निवासियों ने भी इस पहल का दिल से स्वागत किया है और अपने बच्चो को ख़ुशी ख़ुशी इस स्कूल में भेज रहे है। अंग्रेजी माध्यम स्कूल में अपने बच्चो को पढ़ने का सपना तो हर अभिभावक देखता है पर मोटी फीस की वजह से अक्सर ये सपना सपना ही रह जाता है। पर अब ऐसा नहीं होगा। साथ ही पर्यावरण की भी रक्षा होगी और इसके अलावा बच्चो में शुरू से ही पर्यावरण को बचाने की भावना पैदा होगी।

 

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