महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में उमरखेड नामक एक गाँव है। गाँव के कुछ युवकों ने उद्देश सोशल फाउंडेशन की स्थापना की है, जिसका मकसद गरीब लोगो की भलाई करना है। इस संस्था के माध्यम से आज तक बहुत सारे उपक्रम आयोजित किये गये है। जरूरतमंद लोगों को सभी कार्यक्रमों से लाभ हुआ है।

दीपक ठाकरे पढाई पूरी करने के बाद उमरखेड में अपना व्यवसाय करने लगे। जब दिपक अपने आसपास गरीबो को देखते थे तब हमेशा उनके लिये कुछ न कुछ करने की सोचते थे।

उन्होंने सिंधुताई सपकाल के बारे में बहुत कुछ सुना था। सिंधुताई ( माई ) ने कई अनाथ बच्चो को गोद लिया था और उनके लिये वो आश्रम चला रही थी, जिससे दिपक काफी प्रभावित थे।

हमें भी ऐसा कुछ करना चाहिये इस विचार से प्रेरित होकर उमरखेड में दीपक और उनके मित्रों ने एकत्रित होकर 15 अगस्त 2007 को उद्देश सोशल फाउंडेशन की शुरुआत की।

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सिंधुताई के साथ संस्था के सदस्य !

इसी दिन उन्होंने अनाथ और अपंग विद्यार्थियों को स्कूल की चीजे जैसे पेन, पेंसिल, वाटर बैग, कंपास और स्कूल बैग प्रदान की।

दिपक कहते है “मैं हमेशा सिंधुताई के बारे में सुनता था, जिससे मुझे समाज के लिये कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिली। अपनी पढाई पूरी करने के बाद मैंने गाँव में 2004 में पैथोलॉजी लैब का व्यवसाय शुरू किया। मेरे गाँव के आसपास रहने वाले गरीब लोगो की मदद करने के लिए मैंने गाँव के कुछ युवको के साथ मिलकर ये संस्था शुरू की है। संस्था में हमने अब तक बहुत सारे कार्यक्रम आयोजित किये है जिससे लोगो को फायदा हुआ है।”

संस्था के माध्यम से अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये है जैसे वाहन मुक्त रैली, जिसमे लोगो ने साइकिल चलाकर प्रदुषण कम करने का सन्देश दिया। हाल ही में नागपंचमी के दिन संस्था ने सर्प-मित्र (सांप पकड़ने वाले) का सन्मान किया और उन्हें साप पकड़ने के लिये औज़ार की किट दी। संस्था ने अब तक बेटी बचाओ अभियान, रक्तदान शिबिर, आरोग्य शिबिर, बाढपीड़ित लोगो को अन्नदान जैसे कई कार्यक्रम का आयोजन किया है। सभी कार्यक्रम सफल हुये है और ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद लोगो ने इसका फायदा उठाया है।

संस्था के सदस्य वैभव कोडगिरवार कहते है “गरीबो की मदद करके हमें मानसिक समाधान मिलता है। सभी सदस्य अपने काम में व्यस्त होते है पर समाज के प्रति हमारा कर्तव्य पूरा करने के उद्देश से रविवार के दिन हम सब एकत्रित होकर लोगो की मदद करने के लिये कार्यक्रम का आयोजन करते है।”

संस्था के सदस्यों ने देखा कि उमरखेड और आसपास के गावों में बहुत सारे ऐसे लोग है, जिनके पास पहनने के लिये अच्छे कपडे नहीं है। इसलिये संस्था ने कपड़ा बैंक की शुरुआत की जिसका उद्देश गरीबों में कपडे बाटना था।

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संस्था की तरफ से खोला गया कपड़ा बैंक।

फाउंडेशन ने गाँव में एक कमरा किराये पर लिया है। फाउंडेशन के सदस्य लोगो को अपने पुराने कपडे दान करने के लिये अनुरोध करते है और जमा किये कपडे इस कमरे में रखते है। कपड़ो को धो कर बच्चे, युवा, महिला और बुढो के कपड़ो की श्रेणी में बांटकर उन्हें अलग अलग खानों में रखा जाता है। बुधवार को उमरखेड में बाजार होता जिसमे पास के सभी गाववाले जरूरती चीजे खरीदने के लिये आते है। जिन गरीब लोगो को कपड़ो की जरुरत होती है वो बाजार के दिन कपड़ा बैंक में आते है और कपडे ले जाते है। कपड़ा बैंक आसपास के गाँव में भी प्रसिद्ध हुआ है और एक अच्छे उपक्रम के तौर पर उभर कर आया है।

उमरखेड के पास हदगाँव में श्री दत्त बालकाश्रम है जहा पर संस्था के सदस्य अपना जन्मदिन मनाते है। इतना ही नहीं उस दिन सदस्य अन्नदान के साथ अन्य चीजे भी भेट करते है। संस्था ही आश्रम की साड़ी ज़िम्मेदारी उठाती है।

सरकार द्वारा चलाये जानेवाले स्वच्छ भारत अभियान से फाउंडेशन के सदस्य प्रेरित है और अपने गाँव को स्वच्छ और समृद्ध बनाने के लिये काम कर रहे है।

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स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर संस्था गाँव को सुंदर बना रही है।

त्यौहार के दिन लोग घर में पूजा करते है और पूजा में जमा हुए फूल और बाकी सामान खुली जगह पर फेक देते है या फिर नदी में बहा देते है। गणपति या दुर्गादेवी के उत्सव में भी मंडल बहुत सारा निर्माल्य फेक देते है। गाँव स्वच्छ और सुंदर दिखना चाहिये इस उद्देश से सदस्यो ने गाँव में त्यौहार के दिन सफाई अभियान भी शुरू किया।

संस्था के युवक त्यौहार में ज़मा होने वाले पूजा के फूल और मालाओं को एक जगह इकट्ठा करते है और उसे कंपोस्ट ख़त तयार करने के लिये भेज देते है।

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निर्माल्य से कंपोस्ट ख़त बनाने के बारे में न्यूज़पेपर में खबर।

गाँव में बहुत सारी पान की दूकाने है। दुकानदार रोज जमा हुआ कचरा यहाँ वहाँ फेकते थे। इससे बीमारिया फैलने का खतरा रहता था, इसलिये सभी दूकानवालो को कूड़ेदान दिया गया।

अब सब लोग अपना कचरा कूड़ेदान में ही डालते है।

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सदस्य पान की दूकान पर कचरा पेटी देते हुये।

 

उद्देश सोशल फाउंडेशन में उमरखेड के 35 सदस्य है जो नौकरी या व्यवसाय करते है। सब अपने काम में व्यस्त रहते है फिर भी सभी सदस्य समाज कार्य के लिये वक्त निकाल लेते है। कार्यक्रम रविवार, छुट्टी या फिर त्यौहार के दिन किये जाते है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसमे शामिल हो सकते है।

गाँव के लोग नशे के अधीन हो चुके है। बच्चे भी कम उम्र से गुटखा और दारू जैसे व्यसन की शुरुआत करते है। इस बात को मद्दे नजर रखते हुये उद्देश की टीम ने गाँव में 9 जनवरी को व्यसन मुक्त दिवस मनाया। संस्था के इस अभियान से गाँव के लोग बहुत ही प्रभावित है।

उद्देश की टिम गाँव में मतदान करने के लिये लोगो को प्रेरित करते है। सदस्य लोगो के पास जाकर उन्हें मतदान के बारे में जानकारी देते है।

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मतदान का प्रचार करते हुये संस्था के सदस्य।

मतदान हमारा हक़ है और हमें इसे कर्तव्य समझकर निभाना है इस भावना से सदस्य काम कर रहे है। लोगो को मतदान करने के लिये सभी सदस्य जनजागृति कर रहे है। उस दिन पूरी टीम एकत्रित होकर लोगो के पास जाकर उन्हें मतदान का महत्व समझाती है।

दीपक कहते है संस्था के सदस्य अतुल पत्तेवार, सुधाकर पडूकोने,संदीप तेला, अरविंद सूर्यवंशी, अमोल जाधव, नितिन बंग, गोपाल भराडे, प्रशांत मामीडवार, डॉ. श्रीराम रावते, डॉ. विवेक कुलकर्णी, डॉ. मनिष खंडेलवाल, डॉ. आशीष उगले, डॉ. गोपाल देशमुख, विरेंद्र खंदारे, संतोष जिल्हेवार, डॉ. संदीप वानखेड़े, वैभव कोडगिरवार, मुकिंदा पेंशनवार, गोविंद सोमाणीसभी ने मेहनत और लगन से संस्था को आगे बढाया है।

सभी सदस्य हर महीने में कुछ पैसे जमा करते है जिसका उपयोग गरीबो के मदद के लिये किया जाता है। दीपक और उनके साथियो द्वारा शुरू किये गये संस्था से आज तक बहुत सारे लोगो को मदद मिली है। कम समय में ज्यादा लोग इससे जुड़ गये है।

अधिक जानकारी के लिए आप दीपक ठाकरे, क्लिनिकल लेबोरेटरी, संजोग भवन के पास, उमरखेड, जिला यवतमाल, महाराष्ट्र पर संपर्क कर सकते है या deepakthakareukd80@gmail.com पर लिख सकते है।

 

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