आपने अपनी जिंदगी में कई यात्राएं की होंगी जिनसे आपकी ज़िन्दगी में कई बदलाव आये होंगे। लेकिन हम आपको जिस यात्रा के बारे में बताने जा रहे है वो जरा हट के है। एक ऐसी यात्रा जो आपको जीने का मकसद देता है। एक ऐसी यात्रा जो आपमें कुछ करने का जुनून पैदा करता है। एक ऐसी यात्रा जो आपके सपनों को धरातल पर लाने का हौसला देता है। एक ऐसी यात्रा जो आपकी जिंदगी की दिशा बदल देगी। हम बात कर रहे है युवा प्रेरणा यात्रा की, जिसमें शामिल होकर हर साल सैकड़ों युवा अपने करियर को सही दिशा दे रहे है।

युवा प्रेरणा यात्रा का उद्देश्य देश की सूरत को बदलना, गांव को सशक्त और विकसित बनाना, पलायन को रोकना और स्टार्ट अप अर्थात स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। आई फॉर नेशन संस्था के बैनर तले यह यात्रा हर साल आयोजित की जाती है, जिसमें भाग लेने के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की जरुरत नहीं है। जरूरत है, तो बस कुछ कर गुजरने के  जज्बे , जोश और जुनून की।

युवा प्रेरणा यात्रा में हर साल करीब 100 युवाओं की टोली को असल जिंदगी के नायक चैंपियन्स से मिलाते है ताकि ये युवा भी दूसरों के लिए मिसाल बन सके।

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युवा प्रेरणा यात्रा के संस्थापक रितेश गर्ग उत्तराखंड के रुड़की के मंगलौर गांव के रहने वाले है। बनारस हिन्दू विश्वविधालय से एमबीए करने के बाद रितेश ने देश के लिए कुछ करने की ठानी। साल 2010 से 2012 तक रितेश ने पूरे देश का भ्रमण किया, खासकर ग्रामीण ईलाकों में इनकी बहुत ज्यादा रूची थी।

इस यात्रा में रितेश ने महसूस किया कि देश की हर समस्या गांव से जाकर ही जुड़ जाती है। लोग गांव छोड़ रहे है और शहर में जैसे- तैसे भरण पोषण कर रहे है।

मैदानी इलाकों से होते हुए जब रितेश उत्तराखंड पहुंचे तो एक बुजुर्ग ने अपने गांव की व्यथा सुनाते हुए कहा कि, “पहाड़ का पानी और जवानी पहाड़ के काम कभी नहीं आते। क्योंकि जवान लोग रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर बड़े शहरों में चले  जाते  है और नदियों और बारिश का पानी बहकर मैदानी इलाकों में चला जाता है।”

बुजुर्ग के  कहे इस एक वाक्य ने युवा प्रेरणा यात्रा की नींव रख दी।

रितेश ने वहां के युवाओं से बात करके, उन्हें स्वरोजगार के प्रति जागरूक करने की कोशिश की लेकिन पहाड़ पर बसे युवाओं में स्वरोजगार और उद्यमी बनने को लेकर बहुत नकारात्मक सोच थी।

टीबीआई से बात करते हुए आई फॉर नेशन और युवा प्रेरणा यात्रा के संस्थापक रितेश गर्ग ने बताया, “नकारात्मक सोच वाले युवाओं को बदलने के लिए सबसे अच्छा तरीका था, उन्हें ऐसे लोगों से मिलवाना जो बुरे से बुरे हालात में रहकर भी अच्छे काम कर रहे है और अपनी जिंदगी में बदलाव तो ला ही रहे है साथ ही साथ समाज को भी बदल रहे है।”

रितेश बताते है कि जब मैंने पहाड़ का पानी और जवानी दोनो पहाड़ के काम नहीं आते वाली कहावत सुनी तभी मैने ये ठान लिया था कि क्यों ना पानी और जवानी को एक दूसरे के साथ जोड़ दिया जाए ताकि वे एक दूसरे का विकल्प बने और इसके लिए सबसे जरुरी था पहाड़ के युवाओं को अपने इलाके में रहकर स्वरोजगार के लिए तैयार करना। इसी कड़ी में इन्हीं युवाओं को केंद्र में रखकर युवा प्रेरणा यात्रा की शुरूआत की गई।

युवा प्रेरणा यात्रा की शुरूआत सबसे पहले मई 2013 में की गई। इसमें 100 युवाओं का चयन किया जाता है, जिसमें से 50 युवा पहाड़ी इलाकों के होते है और 50 अन्य इलाकों से। सात दिन तक चलने वाली इस यात्रा में दर्जनों चैंपियन्स से युवाओं की मुलाकात करवाई जाती है ।

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युवा प्रेरणा यात्रा

इस यात्रा की जान है ये चैंपियन्स, जिनसे इन युवाओं को मिलवाया जाता है ताकि इनकी सोच में बदलाव आये। युवा प्रेरणा यात्रा शुरू करने से पहले जमीनी स्तर पर विपरीत हालातों में अदम्य इच्छाशक्ति और अपने काम के बल पर अपनी पहचान बना चुके युवाओं को चैंपियन के रुप में चुना जाता है। साथ ही ऐसे लोगों को भी चुना जाता है, जिन्होने अभिनव प्रयोग कर कुछ नया कर दिखाया हो। इन्हीं चैंपियन्स से यात्रा में शामिल युवाओं को मिलवाया जाता है और उनका काम भी दिखाया जाता है ताकि असंभव लगने वाला काम भी उनको असान लगने लगे और वो प्रोत्साहित होकर अपना व्यवसाय शुरू कर सके।

युवा प्रेरणा यात्रा का मूल भाव साझा करते हुए रितेश ने बताया, “इस यात्रा के जरिए हमारा उद्देश्य उभरते हुए चैंपिंयन्स के द्वारा युवाओं को सशक्त बनाना है ताकि हर युवा अपने इलाके में रहकर कुछ नया करें।”

पिछले चार साल से लगातार जारी इस युवा प्रेरणा यात्रा का रिजल्ट अब धरातल पर दिखने लगा है।

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रितेश गर्ग

रितेश बताते है, “यात्रा में भाग ले चुके करीब 40 फीसदी युवा आज आंत्रप्रन्योर (व्यवसायी) बनने की राह पर है वहीं कई ऐसे युवा है जो स्वयं ही एक मिसाल बन चुके है। इस यात्रा में शामिल बहराइच के हिमांशु कालिया ने अपने गांव के लोगों के साथ मिलकर मगरमच्छ सेंक्चुरी, कटरनिया घाट के पास ईको हट बनाएं है जो आज पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वहीं उत्तराकाशी, यमुनोत्री के नौगांव के किसान ऐसी उन्नत खेती कर रहे है कि मदर डेयरी ने उनसे हाथ मिलाया है और वहां से सब्जियां एवं फल ट्रकों के माध्यम से रोजाना सप्लाई हो रहा है।”

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहनेवाले, जीवन ठाकुर अपने गांव को आदर्श ग्राम बनाने में जुटे है। ऐसे सौ से भी ज्यादा लोग हैं जिनकी जिंदगी युवा प्रेरणा यात्रा में भाग लेने के बाद बिल्कुल बदल गई है।

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जीवन ठाकुर ने युवा प्रेरणा यात्रा से जुड़ने के बाद अपने गाँव को आदर्श ग्राम बनाने की मुहीम छेडी

रितेश गर्ग कहते है, “यह यात्रा सीखने के लिए है, यात्रा में शामिल लोग जमीनी हीरो अर्थात चैंपियन्स से मिलते है, उनकी चुनौतियों को समझते है और बुरे से  बुरे हालात में भी अपनी इच्छाशक्ति के बूते कैसे सफल बने उसकी कला को समझाते है। तब जाकर लोगों में आत्मविश्वास जागृत हो पाता है कि हम भी कुछ कर सकते है।”

रितेश आगे जोड़ते है कि, “यात्रा के बाद भी अगर कोई प्रतिभागी किसी काम को शुरू करता है और कुछ दिक्कत होती है तो वहां आई फॉर नेशन की टीम उनकी मदद करती है।”

युवा प्रेरणा यात्रा एक आंदोलन है जो गांव के विकास के लिए चलाया जा रहा है। इनका मकसद छोटे व्यापार को बढ़ावा देना और जिला उद्योग केंद्र को गांव स्तर पर सक्रिय करना है, ताकि गाँवों से युवाओं का पलायन रुके।

अगर आप भी युवा प्रेरणा यात्रा में शामिल होकर अपनी जिंदगी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते है तो तैयार हो जाईए, साल 2017 की युवा प्रेरणा यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन जुलाई माह से शुरू होने वाली है। इस यात्रा में शामिल होकर आप देहरादून से हिमालय की तलहटी में बसे गांवों के रियल हीरोज से मिल पाएंगे।

युवा प्रेरणा यात्रा से जुड़ी ज्यादा जानकारी एवं रजिस्ट्रेशन के लिए उनकी वेबसाइट पर लॉगिन करें।

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