हम सब बदलाव की बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन जब बदलाव के लिए कदम उठाने का असल वक्त आता है तो घर बैठकर छुट्टी मना रहे होते हैं। हर दिन खीज और झल्लाते परिस्थितयों को बदलने के लिए हम एक बटन दबाने के लिए घरों से तक नहीं निकलते हैं। 

में मल्लापुरम जिले के पल्लिकल के आब्दू समद से बहुत कुछ सीखना चाहिए। लोकतंत्र का हिस्सा बनने का जुनून इस कदर है कि समद अपने मत का कोई भी अवसर नहीं छोड़ते। 25 साल के समद ने पिछले साथ साल में कोई चुनाव नहीं छोड़ा जिसमें उन्होंने वोट न दिया हो।

हाथ न होने से कितने ही कामों की हम कल्पना नहीं कर सकते हैं। लेकिन कहते हैं ना कि जहाँ चाह है वहाँ राह निकल ही आती है। कोई सबकुछ होते हुए भी रोता है और एक शख्स हाथ न होने के बाबजूद बदलाव के लिए पैरों से वोट डालता है।
समद अभी समाजशास्त्र में एम. ए. की पढाई कर रहे हैं। 11 साल की उम्र में बिजली पकड़ने की दुर्घटना के बाद उनके हाथ काटने पड़े। लेकिन समद ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पैरों से लिखना शुरू किया और कठिन परिश्रम के बाद वे सफल हुए। आज रोजमर्रा के कामो से लेकर मोबाइल चलाने तक का काम वे अपने पैरों से करते हैं।

चुनाव अभियानों में वे सबसे आगे रहते हैं। चुनाव के दौरान समद पूरे गाँव में घूम घूम कर अपने प्रत्याशी के लिए वोट मांगते हैं।

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picture source – Times Of India
“हर चुनाव मुझे एक अनोखा अनुभव देकर जाता है। यही दिन होता है जब मुझे एहसास होता है कि मेरा वोट भी मायने रखता है और सबके साथ गिना जाता है,” समद ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया
समद वोटिंग के दौरान एक पैर पर संतुलन बनाकर दूसरे पैर के अंगूठे से ईवीएम का बटन दबाते हैं।
प्रत्याशियों को चुनने के बारे में वे बताते हैं-
“ई वी एम में प्रत्याशी का नाम ढूँढना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि मै अपने मोबाइल की कॉन्टेक्ट लिस्ट के 460 नंबरों मे से रोज किसी न किसी का नंबर ढूंढता हूँ।”
पल्लिकल के पंचायत सदस्य के. एम. अली कहते हैं कि चुनाव के दौरान समद का उत्साह हम सबको प्रेरित करता है।
“चाहे बारिश हो या कड़ी धूप, वो वोटिंग लाइन में लगने वाला पहला शख्स होता है।”
अपने हालिया वोट को याद करते हुए समद बताते हैं कि अक्सर वोटिंग अधिकारी मुझे वोटिंग करते देखकर अचंभित रह जाते हैं।
“पिछली बार तो एक अधिकारी ने उठकर मेरे कंधे पर वोटिंग स्टाम्प चेक भी किया. मेरे उंगली नहीं हैं तो वोटिंग के बाद निशान पैर की ऊँगली पर लगा दिया जाता है और मैं रजिस्टर पर हस्ताक्षर भी पैर से ही करता हूँ।”
हम आब्दू समद के हौसले को सलाम करते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनके जूनून से हममें भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने की प्रेरणा पनपेगी।

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