दिल्ली के चित्रकार, अनुपम तोमर उन कम लोगों में से एक हैं जो सडकों पर घायल पशुओं की सेवा करते हैं। अनूपम और उनकी पत्नी,  पशुओं के लिए काम कर रही कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। लोगो का जानवरों के प्रति असहानुभूतिपूर्ण रवैये से इन दोनों को बहुत कष्ट पहुचता है। अनुपम यह समझने में खुद को असमर्थ पाते हैं कि कैसे लोग उन जानवरों की भी अनदेखी कर देते हैं, जो सड़क पर पड़े कराह रहे हो।

अनुपम ने अपने कुत्ते मोचा को तीन साल पहले सड़क पर पाया था।

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वहाँ से ला कर अनुपम ने उसे अपने परिवार का हिस्सा बनाया। आज वे उसके साथ बहुत खुश है और खुद को उससे बहुत जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

थोडा विचार करने पर अनुपम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अधिकतर लोग पीड़ित जानवरों की मदद करने में सिर्फ इसलिए असमर्थ होते हैं, क्यूंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि किस प्रकार इन जानवरों को मदद पहुंचाई जा सकती है।

दिल्ली में जानवरों के आवासों से जुडी संस्थाओं के संपर्क में आने के बाद, अनुपम ने यह महसूस किया कि इन संस्थाओं के पास ऐसे जानवरों को बचाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। उन्हें समझ में आया कि अपर्याप्त धनराशि और एम्बुलेंस की कमी इन जानवरों की मदद के बीच आ रही थी।

इस पर बहुत विचार करने के बाद, आखिरकार अनुपम ने ‘ प्रोजेक्ट पॉ रेस्क्यू’ की शुरुआत की।

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अपनी इस पहल के द्वारा वे आवारा जानवरों की मदद करना चाहते हैं। अनुपम  इस प्रोजेक्ट द्वारा पैसे इकट्ठे कर एक सेकेंड हैण्ड वैन खरीदना चाहते हैं, जिसे वो पशुओं के एम्बुलेंस में तब्दील कर सकें। इन पैसों को वो ‘वौइस् ऑफ़ वोइसलेस” नाम संस्था को देना चाहते हैं।

वे बताते हैं, ” मैंने इस संस्था के साथ काम किया है और मैंने देखा है कि यह संस्था जानवरों की भलाई के लिए बहुत कुछ कर रही है। पर अभी पैसे की कमी के कारण यह एम्बुलेंस खरीदने में असमर्थ है। इस संस्था को एम्बुलेंस की सुविधा की बहुत आवश्यकता है।”

अनुपम को यह विश्वास है कि एम्बुलेंस की सुविधा होने पर न सिर्फ कष्ट में पड़े जानवरों की मदद की जा सकेगी, बल्कि लोगो को इन जानवरों के प्रति जागरूक करना भी आसान हो जाएगा। कई लोग जिन्हें मालूम नहीं है कि इन जानवरों की मदद कैसे की जा सकती है, उनके मन में इनके लिए प्रेम और सहानुभूति पैदा की जा सकेगी ।

अनुपम कहते हैं, ” कम से कम मैं इतना तो कर ही सकता हूँ। और यह सिर्फ एक शुरुआत होगी। मुझे यकीन है कि इस सुविधा से लोगो की मानसिकता ज़रूर बदलेगी। “

एक चित्रकार होने के नाते, अनुपम इस वैन को कैनवास के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं, जिस से अधिक से अधिक लोग इसकी ओर आकर्षित हों। इनकी इच्छा है कि इस में उन सारे व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम हों, जिन्होंने इसमें योगदान दिया है ।

10000 रु से अधिक योगदान करने वाले को, अनुपम अपनी मौलिक चित्रकला, एक थैंक्यू सर्टिफिकेट और एक केलिन्डर भेंट करेंगे ।

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अनुपम ‘मिलाप’ द्वारा एम्बुलेंस  के लिए धनराशी एकत्रित कर रहे हैं। किसी भी प्रकार का योगदान करने के लिए आप इस पेज पर संपर्क कर सकते हैं।

Featured image source: wikipedia

मूल लेख मेरील गार्सिया द्वारा लिखित

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