पेशे से मैकेनिकल इंजिनियर, विजय ठाकुर ने अपना पहला बच्चा महज इसलिए खो दिया क्यूंकि रात के समय कोई टैक्सी वाला उन्हें अस्पताल तक ले जाने के लिए तैयार नहीं था। वे चाहते थे कि जो हादसा उनके साथ हुआ, वो किसी और  के साथ न हो और इसलिए वे अपनी नौकरी छोड़कर टैक्सी ड्राईवर बन गए।
विजय ठाकुर १९८२ में मुंबई में लार्सेन एंड टुब्रो(L & T) में मैकेनिकल इंजिनियर के तौर पर काम कर रहे थे। वहां उन्हें अच्छी खासी तनख्वाह मिल रही थी। शादी के बाद उनकी ज़िन्दगी और भी ख़ूबसूरत हो गयी जब उन्होंने सरोज को अपनी  पत्नी के रूप में पाया। जल्दी ही उन्हें पता चला कि वो पिता बनने वाले हैं, तब तो उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।

मार्च १९८२ में एक रात जब सरोज केवल ३ महीने की गर्भवती थी तब उन्हें पेट में तेज़ दर्द शुरू हो गया। विजय बहार भागे ताकि टैक्सी का इंतज़ाम कर सके पर उस समय रात के २ बज रहे थे और कोई टैक्सी वाला उन्हें ले जाने को तैयार नहीं हओ रहा था ।आखिरकार वो दौड़ते हुए अँधेरी स्टेशन तक गए और एक टैक्सी वाले को ३०० रूपये देकर घर लाये जिसकी कीमत आजकल ३००० रूपये होगी। वो सरोज को नानावटी अस्पताल लेकर गये पर अपने बच्चे को बचा नहीं सके। विजय और सरोज ने अपना बच्चा इसलिए खोया क्यूंकि कोई भी टैक्सी ड्राईवर अपना काम करने को तैयार नहीं था। विजय इस घटना के बाद पूरी तरह हिल गये थे। वो सोचते रहे कि जो उनके साथ हुआ वो किसी और के साथ नहीं होना चाहिए।

“मैं अच्छा खासा कमा रहा था इसलिए मैं टैक्सी के लिए दुगुना पैसे दे सकता था पर उन लोगों का क्या जो ऑटो रिक्शा का किराया देने में भी सक्षम नहीं होते”, विजय कहते हैं।

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Pic source: www.theweek.in

विजय अब ऐसे लोगों के लये कुछ करना चाहते थे  पर उनकी नौकरी उन्हें इसके लिए समय नहीं देती थी। तभी उनकी कंपनी ने १९८४ में  एक स्वैच्छिक रिटायरमेंट स्कीम की शुरुआत की। विजय ने ये ऑफर स्वीकार कर टैक्सी ड्राईवर बनने का निश्चय किया और खुद से एक वादा किया कि वो  कभी किसी भी पैसेंजर को “ना “ नहीं कहेंगे। उन्होंने ६६,००० रूपये में एक फ़िएट कार खरीदी और टैक्सी का परमिट ले लिया।

वो अपने ग्राहकों के लिए हमेशा उपलब्ध होते हैं।

“मैं सुबह २-४ बजे के बीच कभी नहीं सोता क्यूंकि इस वक़्त किसी भी मरीज़ को इमरजेंसी में टैक्सी की ज़रूरत पड सकती है “, विजय कहते है।

परिवार और पत्नी के विरोध के बावजूद विजय अपना काम करते रहे। पर फिर से १९९९ में उनकी ज़िन्दगी में एक दुखद मोड़ आया जब उनके छोटे बेटे को घुटने पर गेंद से चोट लगी। पहले  उन्होंने और उनकी पत्नी ने इसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया पर जब सूजन बहुत बढ़ गयी तो वे उसे डॉक्टर के पास ले गये। ये छोटी सी चोट कैंसर का रूप धारण कर चुकी थी और १६ दिन के अन्दर उनका १९ वर्षीय बेटा इस संसार से विदा हो गया।

विजय की दुनिया ही उजड़ गयी थी, उन्होंने अपनी सारी जमा पूँजी अपने बेटे के इलाज़ में लगा दी थी।

“एक बार मुझे अपने बेटे के इलाज़ के लिए ४३,००० रूपये जमा करने थे और मेरे पास १० रूपये कम थे। केशियर वो पैसे लेने के लिए तैयार नहीं था। एक अजनबी ने मुझे १० रूपये दिए तब जाकर केशियर ने पैसे लिए और मुझे रसीद दी। इस घटना ने मुझे दूसरों की मदद करने के लिए और प्रेरित किया”, विजय ने बताया।

इस घटना के बाद विजय ने गरीब लोगो से पैसे लेना बंद कर दिया। मुंबई में कोई भी उन्हें कॉल कर सकता है और वो कभी किसी को ना नहीं कहते।

स्मरणीय पलों के बारे में पूछने पर वो कहते हैं कि १५-२० साल पहले वो ३१ दिसम्बर की रात को ३ बजे ऑटो चला रहे थे  जब उन्होंने एक कार को एक टैंकर से टकराते देखा। जब विजय ने कार के अन्दर देखा तो उन्होंने पाया कि वहां एक जोड़ा ८ महीने की बच्ची के साथ था। वो तुरंत उन्हें कूपर अस्पताल ले गये। उसकी माँ  को नही बचाया जा सका पर बच्ची और उसके पिता सही समय पर इलाज़ होने के कारण बच गये। उस महिला ने २ लाख के गहने पहन रखे थे जो डॉक्टर ने विजय को दे दिए। इस परिवार के रिश्तेदारों के आते ही विजय ने वो गहने उन्हें दे दिए और वहां से चले गए। बाद में उनको पता चला कि वो फिल्म निर्माता सुधाकर बोकाडे और उनका परिवार था। घर आने के बाद बोकाडे ने उन्हें पैसे देने चाहे पर विजय ने मना कर दिया।

“मैं ये सब पैसों या प्रसिद्द होने के लिए नहीं करता, मैं जिनकी मदद करता हूँ उन्हें याद भी नहीं रखता”, विजय कहते हैं।

विजय ठाकुर को अमिताभ बच्चन ने अपने शो, ‘आज की रात है ज़िन्दगी’ में सम्मानित किया था जहाँ वो अपने पसंदीदी अभिनेता जीतेंद्र से मिले।

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“यह मेरे ज़िन्दगी के सबसे खुशनसीब पलों में से एक है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं जीतू जी से मिलूँगा। मैं उनका बहुत बड़ा फैन रहा हूँ और उनकी फिल्मे देखने के लिए अक्सर स्कूल से भाग जाया करता था। मैंने ‘फ़र्ज़ ‘ ३१ बार सिर्फ जीतू जी के कारण देखी है”, विजय कहते हैं।

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पर यह आदमी, जिसने अपना सुनहरा करियर त्याग कर, लोगो की सेवा करने के लिए टैक्सी ड्राईवर बनना स्वीकार किया, जिसने ५०० से भी अधिक जरूरतमंद मरीजों की मदद की, और हज़ारों लोगों को  बिना किसी शिकायत के मदद की है, आज उन्ही को आपकी मदद की ज़रूरत है।

वो अब लगभग ७३ वर्ष के हो गए हैं और हाल में ही उन्हें पता चला है कि उन्हें सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस है।

“डॉक्टरों का कहना है कि मुझे ऑपरेशन की जरुरत है। वो ये भी कहते हैं कि इसमें मेरी मौत भी हो सकती है या फिर मुझे लकवा भी मार सकता है। पर लोग कहते हैं कि मेरे साथ बहुत सारे लोगों की दुआएं है इसलिए मुझे कुछ नहीं होगा”, वो कहते हैं।

अगर आप विजय ठाकुर की मदद करना चाहते हैं तो आप उन्हें इस नम्बर पर कॉल कर सकते हैं – +91 9819001689.

मूल लेख मानबी कटोच द्वारा लिखित।

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