स्वर्ग फाउंडेशन, कोयम्बतुर ने एक “आय एम  स्पेशल” कैलेंडर जारी किया है। ये कैलेंडर, उन स्पेशल लोगो को मद्दे नजर रखते हुये प्रकाशित किया गया है, जिन्हें न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स है। इसका उद्देश डिसऑर्डर्स के बारे में लोगो को बताकर जनजाग्रति करना ही नहीं बल्कि ऐसे खास लोगो की कहानी को सबके सामने लाना है। अपनी कमियों को नजरअंदाज करके ये खास लोग ख़ुशी से अपनी जिंदगी गुजार रहे है, इस बात से शायद बाकी लोग प्रेरणा ले सके।

स्वर्ग फाउंडेशन, कोयम्बतुर द्वारा प्रकाशित किये जाने वाले स्पेशल कैलेंडर के मुख्य पन्ने पर जो लिखा है, वो  इन कहानियों को आपके सामने पेश करने का सबसे अच्छा माध्यम है –

मैं स्पेशल हूँ।

मैं सिर्फ स्पेशल नहीं बल्कि लिमिटेड एडिशन हूँ।

मेरे दोस्त और मेरी माँ हमेशा कहते है कि मैं स्पेशल हूँ। मुझे समझ में नहीं आता कि ये मेरी विकलांगता है या बस  एक  शरीर?

जिंदगी में सकारात्मक दृष्टिकोण ना होना ही विकलांगता है।

विकलांगता या बीमारी मेरी पहचान नहीं बन सकती।

स्वर्ग फाउंडेशन इस कैलेंडर द्वारा स्पेशल लोगो की कहानिया आप तक पहूँचाना चाहती है और इसके साथ साथ ६ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डरस के बारे में जनजागृति करना चाहती है। स्पाइनल इंजुरी, मल्टीप्ल सेलोरोसिस , रेटिनल डीटाचमेंट, सेरिब्रल पाल्सी, आटिज्म और इंटेलेकचुअल डिसेबिलिटी, इन ६ बीमारियों के बारे में आम आदमी को जानकारी देना, इस उपक्रम का मुख्य उद्देश है।

जिन लोगो की कहानी इसमे दर्शायी गयी है, वो इन्ही ६ बीमारियों में से एक से पीड़ित है। अपने स्पेशल होने के गम को ये लोग नजरअंदाज करके अपने आसपास के लोगो की मदत करते है, इसलिये ये सचमुच ही खास लोग है।

जनवरी-फेबुवरी: आनंद सेल्वराज

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आनंद सेल्वराज प्याराप्लेगिया से पीड़ित है। ये बीमारी स्पाइन को ज़ख्म होने से या स्पाइनल कैनल के न्यूरल एलिमेंट को क्षति होने से होती है। शरीर पर जिस जगह ज़ख्म होता है वहा से शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से अपाहिज होता जाता है।

आनंद एक टेनिस प्लेयर है जिसने तमिलनाडु राज्य से खेलकर पुरे भारत में नाम कमाया है।

आनंद ने अमेरिका से पब्लिक हेल्थ में पढाई पूरी की है।

आनंद कहते है-

“कुछ भी काम करने के लिये आपको जिद से आगे बढ़ना है, नहीं तो उस काम को पूरी तरह छोड़ना है। इस तरह से ही आप मंझिल को हासिल कर सकते है।”

 मार्च-अप्रैल: स्वर्णलता जे

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स्वर्णलता मल्टिपल स्क्लेरोसिस से पीड़ित है। इस बीमारी से ब्रेन और स्पाइन पर जोर पड़ता है जिससे शरीर के अन्य हिस्सों पर अपाहिजता के लक्षण दीखते है। इससे शरीर का कुछ हिस्सा या पूरा शरीर ही अपाहिज होता है।

इस बीमारी से पीड़ित स्वर्णलता एक प्रवक्ता, काउंसेलर, गायक, पपेटर, ग्रीन क्रूसेडर, लेखक और फोटोग्राफर है। अपनी विकलांगता से आनेवाली हर विपदा को उसने एक अवसर समझकर कुछ ना कुछ हासिल किया है।

स्वर्णलता कहती है –

“मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा है , इसलिये मुझे सहानभूति से ज्यादा सहयोग की जरुरत है।

मई-जून: सबरी वेंकट

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सबरी वेंकट रेटिनल डीटाच से पीड़ित हैI Retinal Detachment ऐसी बीमारी है जिसमे रेटिना अपने जगह से हटकर आँखों को अंधत्व का अहसास देता है। सबरी पूरी जिंदगी में अब देख नहीं पायेगी।

सबरी एक मोटिवेशनल स्पीकर है जो गाने में भी दिलचस्पी रखती है। स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरित होकर उसने उनके जीवन पर आधारित बहुत सारे प्रेरणादायक भाषण दिये है और पुरस्कार भी जीते है। आय .ए. एस जॉइन करके वो भ्रष्टाचार और नीरक्षरता कम करना चाहती है।

हंसमुख सबरी बड़े उत्साह से कहती है-

”यदि आपकी सोच अंधी हो जाए , तो  आँखे  होने का भी कोई फायदा नहीं होता ।  ”

 

जुलाई-अगस्त: अश्वथी

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अश्वथी मेंटल रिटार्डेशन यानी इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटी से पीड़ित है। इससे पीड़ित लोग दिमाग का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाते। जीन्स में हुई गड़बड़ी  ,गर्भावस्था में किसी विशेष जटिलता , दूषित आहार या हवा के संपर्क में आना, आयोडीन की कमी, और कुपोषण की वजह से ये बीमारी होती है।

६ सालकी अश्वथी अभी भी चलने का प्रयास कर रही है। वो अपने माँ पर निर्भर है। उसके शिक्षक और माता-पिता उसे जिंदगी के साथ लड़ने में मदत कर रहे है। ”

अश्वथी का कहना है –

“ मुझे भी आप की तरह भगवान ने बनाया है। आप मुझे सही रास्ता दिखाकर, मेरी मदद करके मुझे सक्षम बनाये। ”

सितम्बर-अक्टूबर: निशांत श्रीराम

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निशांत, आटिज्म से पीड़ित है।  इस बीमारी से शरीर के विकास में बाधा होती है। मरीज सही ढंग से बात नहीं कर पाता है, कुछ बोलने में दिक्कत होती है और उसका स्वभाव भी विचित्र हो जाता है।

निशांत निसर्ग से प्रेम करता है, उसे ट्रैकिंग, साइकिलिंग जैसे साहसी खेलो में दिलचस्पी है। उसने साइकिलिंग में बहुत सारे पुरस्कार जीते है।

वो बडी दिलचस्प बात कहता है-

“अगर आप मेरे अन्दर की शांत स्थिति को नहीं समझ सकते तो मेरे कहे हुये शब्द कैसे समझ सकते है। ”

नवम्बर-दिसम्बर: दिनिशा

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दिनिशा सेरिब्रल पाल्सी से पीड़ित है। इस बिमारी में समन्वय की कमी, कमज़ोर मस्पेशियों और झटको से मरीज परेशान होता है।

दिनिशा हमेशा हसती रहती है। उसे गाने में और डांस करने में रूचि है। उसे बहुत सारे दोस्त बनाने में दिलचस्पी है।

स्वर्णलता की कल्पना से स्पेशल कैलेंडर का निर्माण हुआ है, वो खुद भी कैलेंडर का हिस्सा है। वो और उनके पति गुरुप्रसाद ने स्वर्ग फाउंडेशन की स्थापना की है जो विकलांग लोगो की सहायता करती है।

इस साल, अप्रैल महीने में उन्हें कैलेंडर प्रकाशित करने की कल्पना सूझी। इस कैलेंडर का मुख्य उद्देश इन स्पेशल लोगो के प्रति समाज में आदर निर्माण करना, ऐसी बीमारियों के बारे में जनजाग्रति करना और इन स्पेशल लोगो की जिंदगी जीने के उत्साह को सलाम करना है।

इस कैलंडर को बेचकर जो भी पैसे जमा होंगे उससे फाउंडेशन दिमागी बीमारियों से पीड़ित मरीजो के लिये इस्तेमाल करना चाहते है।

सूरज कुमार ने विडियो बनाने में फाउंडेशन की मदत की है। इस विडियो में स्वर्णलता और सूरज कुमार दोनों ने वाईस-ओवर की भूमिका निभाई है। सागर मोरनकर ने पार्श्वगायन किया है और प्रसन्ना ने संगीत दिया है। सागर सही तरह से देख नहीं पाता है। वो क्लासिकल सिंगर है और कोलकता में ITC म्यूजिक स्कूल में संगीत सिखाता है। १६ साल के उम्र से सागर muscular dystrophy से पीड़ित हुआ। डॉक्टर ने कहा कि ये सिर्फ ३ साल और जियेगा पर अपनी इच्छाशक्ति के बलबूते पर वो आजतक ख़ुशी से अपनी जिंदगी जी रहा है।

स्वर्ग फाउंडेशन के बारे में अधिक जानने के उनकी वेबसाइट पर जाए। कैलंडर को आर्डर करने के लिये यहाँ क्लिक करे।

मूल लेख अपर्णा मेनन द्वारा लिखित।

 

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