झारखण्ड की नयी भोजन वितरण योजना पहुंचाएगी करीब 70000 कमज़ोर आदिवासी परिवारों तक भोजन

पिछले दिनों राज्य सरकार द्वारा झारखण्ड के आदिवासी गाँवों तक हांथो हाथ खाना पहुंचाने की एक योजना लायी गयी। इसका मकसद करीब 70,000 अत्यधिक गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाना है।

बाहुबली का महिष्मति साम्राज्य, भारत के इस प्राचीन शहर के नाम पर आधारित है!

ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, महिष्मति एक मध्यवर्ती भारत में स्थित एक शहर था , जो अब मध्य प्रदेश नामक राज्य बन गया है। कई अभिलेखों और साथ ही कहानियों में भी इस शहर का उल्लेख मिलता है, जो यह बताते हैं कि यह एक शहर और एक एक समय में सामाजिक-राजनीतिक केंद्र था।

इस व्यक्ति की मदद से बिना बिजली बिल भरे आप वातानुकूलित घर में रह सकते हैं!

दिनेश के इस नए घर ने शुन्य से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया है और इसके लिए इन्हें एक बार भी अस्थायी बेस्कॉम कनेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

पौधों को भी गर्मी लगती है! आईये जानें इस गर्मी में कैसे रखें अपने बगीचे को हरा-भरा

गर्मियां आते ही मन में आइसक्रीम और आमों का ख्याल मन में आने लगता है इसके साथ ही हम ऐ.सी. की ठंडी हवा के लिए बेताब हो जाते हैं । इस समय जब हम गर्मियों में ठंडक देने वाले खानों और खुद को ठण्ड पहुंचाने वाली चीजों से जुड़ने लगते हैं, हमारे बगीचे सूरज के तपती किरणों को झेल कर सूखते चले जाते हैं । आइये हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे सरल उपायों के बारे में जिससे कडाके की धुप में भी हमारे पौधे सुरक्षित रहे ।

‘दुनिया को हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए’ केदारनाथ सिंह की उम्मीद की कवितायेँ

केदार जी की कवितायेँ हमारे देश की जमीन की कवितायेँ हैं जहाँ परम्परा-आधुनिकता, सुख-दुःख, गाँव-शहर, खेत और बाजार एक दूसरे से बतियाते नज़र आते हैं। जीवन की तमाम चुनौतियों में उम्मीद की खोज करती प्रस्तुत हैं केदारनाथ जी की दो कवितायेँ-

विदेशी लेखकों, एक्टरों और राजनयिकों को आसान और मजेदार तरीकों से हिंदी सिखा रहीं पल्लवी सिंह

भाषा मानवीयता का पुल है, हमें जोड़ती है। वैश्वीकरण के इस दौर में हम दुनियां भर में आवास-प्रवास करते रहते हैं, हमारे देश में भी लाखों विदेशी आते हैं और उनकी मुहब्बत कहिए या कौतुहल कि उनमें से अधिकतर यहीं बस जाते हैं। ऐसे लोग हमेशा भाषा का अवरोध झेलते हुए देश में रहने के बाद भी अलग-थलग से नज़र आते हैं। इन्हें हमसे जोड़ने के लिए संवाद अनिवार्य है और संवाद के लिए समान भाषा जरूरी होती है।

कैंसर ने दृष्टि छीनी, पर आईएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं नागपुर की भक्ति घटोळे!

नागपुर की भक्ति घटोळे की नौ साल की उम्र में ही कैंसर ने दृष्टि छीन लीं, लेकिन फिर भी उनके सपने और जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया और आज भक्ति सफलता के स्तम्भ स्थापित करते हुए अपने आइएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं।

39 साल के इस युवक का आखरी सपना था कि इनके अंतिम संस्कार के पैसो से गरीबो के लिए घर बनाया जाएँ!

39 वर्षीय राज की कैंसर के कारण हाल ही में मृत्यु हो गयी। पर जाने से पहले उन्होंने खालसा ऐड इंटरनेशनल के साथ मिल कर एक मुहीम की शुरुआत की, जिसमे उन्होंने लोगो से उनके अंतिम संस्कार पर खर्च न करते हुए गरीबो की मदद के लिए पैसे दान करने की अपील की।

तमिल नाडु के सूखाग्रस्त गांव में हरियाली ले आए पंजाब के ये दो किसान।

रामनाथपुरम, जिसे रामनद भी कहा जाता है,दक्षिणी तमिलनाडु के सबसे अधिक सूखे जिलों में से एक है। इस जिले के धूल से भरे,धूप से झुलसे अन्दरुनी भाग में एक हिस्सा ऐसा है जो आम, अमरूद, आँवले और तरबूज़ के बगीचों से हरा-भरा है, लेकिन ये हमेशा से ऐसा नहीं था।

पियूष पाण्डेय : चाय चखने से लेकर विज्ञापन की दुनिया के बेताज बादशाह बनने तक का सफ़र!

पियूष पाण्डेय का नाम भारतीय विज्ञापन जगत में मशहूर है और इनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि रचनात्मकता असीमित होती है। अपने अलग तरह के विज्ञापनों के कारण, पियूष ने अनगिनत पुरस्कार जीते हैं और असीमित प्रशंसा बटोरी है।

मिलिए पत्रकार से किसान बने गिरीन्द्रनाथ झा से, जो अब अपने गाँव को नयी पहचान दे रहे है!

एक पत्रकार, एक लेखक, इन्टरनेट की दुनियां का एक जाना माना नाम आखिर क्यूँ एक किसान बन गया? ये कहानी है चनका, बिहार के लेखक किसान, गिरीन्द्रनाथ झा की।

4 सर्जरी और 500 स्टिचस के बाद भी, ये प्रेरक नेवी ऑफिसर हैं वापसी को तैयार।

मौत का सामना करा देने वाली दुर्घटनाओं से गुजरना हमेशा ही एक बुरे सपने की तरह होता है। बिनय कुमार, एक पूर्व नेवी ऑफिसर ने भी ऐसी ही एक दुर्घटना का सामना किया लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने इसी शानदार जज्बे के चलते अब वो वापसी को तैयार है।

मुंबई के 300 छात्रों ने 2 साल तक हर रविवार साथ मिलकर काम किया और इस गाँव में बना दिये 107 शौचालय।

मुंबई के किशिनचंद चेलारम महाविद्यालय के छात्रो ने सभी को प्रभावित करते हुये पलघर जिले के कारवाले गाँव में 107 शौचालय निर्मित किए हैं जिसमें गाँव में रह रहे हर परिवार के लिए एक शौचालय है।

देशप्रेम के चलते आँगनबाड़ी में काम करने वाली माँ के इस लाल ने छोड़ी TCS कि मोटी तनख्वाह वाली नौकरी, सेना में हुआ भर्ती।

बढ़िया वेतन और सुख सुविधाओं से युक्त जीवन जी रहे भारत दरबार सिंह जाधव टीसीएस में सिस्टम इंजीनियर के रूप मे कार्यरत थे। पर महाराष्ट्र के बुलढाना जिले के एक छोटे से गाँव में आंगनबाड़ी सहायिका के इस बेटे के भीतर कुछ और हासिल करने का जज़्बा पनप रहा था, उनका मुक़ाम था सेना मे शामिल होकर अपने देश कि सेवा करना।

अपना अपार्टमेंट ब्रेन रिसर्च के लिए दान कर, शर्वरी गोखले मृत्यु के बाद भी याद रखी जाएगी!

शर्वरी गोखले —1974 बैच की आईएएस अफसर और मुंबई की पहली महिला कलेक्टर थी। पिछले साल, कैंसर की वजह से उनकी मृत्यु हो गई लेकिन शर्वरी ने मृत्यु - पूर्व ही अपना अपार्टमेंट "सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च" के नाम कर दिया था। ताकि उनकी संपत्ति देश के काम आ सके।