कभी 40 कम्पनियों से नकारे गए थे ये इंजिनियर; आज हैं एक सफल स्टार्ट अप के मालिक!

'पढ़ेगा इंडिया' साउथ दिल्ली में सेकेण्ड हैण्ड किताबें ऐसे लोगों तक पहुंचा रहा है जिनके पास महँगी किताबें खरीदने की क्षमता और दुर्लभ किताबों तक पहुँच नहीं है.

सचिन तेंदुलकर के जीवन से जुड़ी कुछ अनकही कहानियाँ!

यहां सचिन तेंदुलकर के बारे में छह छोटी-छोटी कहानियां और उपाख्यानों की एक लिस्ट है, जो कि फिल्म में हो सकते हैं। इनमें से सचिन की किस कहानी को आप स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित होंगे?

शिमला का यह सुन्दर कैफ़े उम्रकैद की सज़ा काट रहे कैदियों द्वारा चलाया जाता है

इस कैफ़े को राज्य पर्यटन विभाग द्वारा चलाया जा रहा है और इसके पीछे की मंशा इन कैदियों का पुनर्वास और समाज से जोड़ना है।

झारखण्ड की नयी भोजन वितरण योजना पहुंचाएगी करीब 70000 कमज़ोर आदिवासी परिवारों तक भोजन

पिछले दिनों राज्य सरकार द्वारा झारखण्ड के आदिवासी गाँवों तक हांथो हाथ खाना पहुंचाने की एक योजना लायी गयी। इसका मकसद करीब 70,000 अत्यधिक गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाना है।

बाहुबली का महिष्मति साम्राज्य, भारत के इस प्राचीन शहर के नाम पर आधारित है!

ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, महिष्मति एक मध्यवर्ती भारत में स्थित एक शहर था , जो अब मध्य प्रदेश नामक राज्य बन गया है। कई अभिलेखों और साथ ही कहानियों में भी इस शहर का उल्लेख मिलता है, जो यह बताते हैं कि यह एक शहर और एक एक समय में सामाजिक-राजनीतिक केंद्र था।

इस व्यक्ति की मदद से बिना बिजली बिल भरे आप वातानुकूलित घर में रह सकते हैं!

दिनेश के इस नए घर ने शुन्य से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया है और इसके लिए इन्हें एक बार भी अस्थायी बेस्कॉम कनेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

पौधों को भी गर्मी लगती है! आईये जानें इस गर्मी में कैसे रखें अपने बगीचे को हरा-भरा

गर्मियां आते ही मन में आइसक्रीम और आमों का ख्याल मन में आने लगता है इसके साथ ही हम ऐ.सी. की ठंडी हवा के लिए बेताब हो जाते हैं । इस समय जब हम गर्मियों में ठंडक देने वाले खानों और खुद को ठण्ड पहुंचाने वाली चीजों से जुड़ने लगते हैं, हमारे बगीचे सूरज के तपती किरणों को झेल कर सूखते चले जाते हैं । आइये हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे सरल उपायों के बारे में जिससे कडाके की धुप में भी हमारे पौधे सुरक्षित रहे ।

‘दुनिया को हाथ की तरह गर्म और सुंदर होना चाहिए’ केदारनाथ सिंह की उम्मीद की कवितायेँ

केदार जी की कवितायेँ हमारे देश की जमीन की कवितायेँ हैं जहाँ परम्परा-आधुनिकता, सुख-दुःख, गाँव-शहर, खेत और बाजार एक दूसरे से बतियाते नज़र आते हैं। जीवन की तमाम चुनौतियों में उम्मीद की खोज करती प्रस्तुत हैं केदारनाथ जी की दो कवितायेँ-

ग्रीन ग्रुप से महिलाओं को सशक्त बनाकर गाँवो में उम्मीद रोपते ‘होप’ समूह के छात्र

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों ने होप नाम की एक संस्था बनाई है, जिसमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के साथ काशी विद्यापीठ, दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र और प्रोफेसर जुडकर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. ये छात्र गांवों में जाकर वहाँ की समस्याओं को अपने बेहतर आइडिया से समाधान में बदल रहे हैं.

विदेशी लेखकों, एक्टरों और राजनयिकों को आसान और मजेदार तरीकों से हिंदी सिखा रहीं पल्लवी सिंह

भाषा मानवीयता का पुल है, हमें जोड़ती है। वैश्वीकरण के इस दौर में हम दुनियां भर में आवास-प्रवास करते रहते हैं, हमारे देश में भी लाखों विदेशी आते हैं और उनकी मुहब्बत कहिए या कौतुहल कि उनमें से अधिकतर यहीं बस जाते हैं। ऐसे लोग हमेशा भाषा का अवरोध झेलते हुए देश में रहने के बाद भी अलग-थलग से नज़र आते हैं। इन्हें हमसे जोड़ने के लिए संवाद अनिवार्य है और संवाद के लिए समान भाषा जरूरी होती है।

कैंसर ने दृष्टि छीनी, पर आईएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं नागपुर की भक्ति घटोळे!

नागपुर की भक्ति घटोळे की नौ साल की उम्र में ही कैंसर ने दृष्टि छीन लीं, लेकिन फिर भी उनके सपने और जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया और आज भक्ति सफलता के स्तम्भ स्थापित करते हुए अपने आइएएस बनने के सपने की ओर बढ़ रही हैं।

39 साल के इस युवक का आखरी सपना था कि इनके अंतिम संस्कार के पैसो से गरीबो के लिए घर बनाया जाएँ!

39 वर्षीय राज की कैंसर के कारण हाल ही में मृत्यु हो गयी। पर जाने से पहले उन्होंने खालसा ऐड इंटरनेशनल के साथ मिल कर एक मुहीम की शुरुआत की, जिसमे उन्होंने लोगो से उनके अंतिम संस्कार पर खर्च न करते हुए गरीबो की मदद के लिए पैसे दान करने की अपील की।

तमिल नाडु के सूखाग्रस्त गांव में हरियाली ले आए पंजाब के ये दो किसान।

रामनाथपुरम, जिसे रामनद भी कहा जाता है,दक्षिणी तमिलनाडु के सबसे अधिक सूखे जिलों में से एक है। इस जिले के धूल से भरे,धूप से झुलसे अन्दरुनी भाग में एक हिस्सा ऐसा है जो आम, अमरूद, आँवले और तरबूज़ के बगीचों से हरा-भरा है, लेकिन ये हमेशा से ऐसा नहीं था।